Key Highlights
मध्य प्रदेश एवं गुजरात के आदिवासी बहुल क्षेत्रों, विशेष रूप से भील (Bhil), भीलाला (Bhilala) तथा राठवा (Rathwa) जनजातियों की सदियों पुरानी अनुष्ठानिक भित्ति चित्रकारी परंपरा, पिथोरा पेंटिंग (Pithora Painting) को वर्ष 2026 में भौगोलिक संकेत (GI) टैग से सम्मानित किया गया है। यह केवल चित्रकारी नहीं है, बल्कि जनजातीय आस्था, संकल्प, मन्नत (badha/mannat) और अनुष्ठान की एक पवित्र व जीवंत लोक परंपरा है। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा प्रश्नपत्र 1 - मध्य प्रदेश की जनजातीय कला व संस्कृति) तथा UPSC GS Paper 1 के दृष्टिकोण से पिथोरा चित्रकला पर यह विस्तृत नोट्स अति-महत्वपूर्ण है।

1. पिथोरा पेंटिंग: मध्य प्रदेश व गुजरात में भौगोलिक विस्तार (Geographical Spread in MP & Gujarat)
- मध्य प्रदेश में मुख्य क्षेत्र (Core MP Region): पश्चिमी मध्य प्रदेश के झाबुआ (Jhabua), अलीराजपुर (Alirajpur) तथा इंदौर (Indore) के निकटवर्ती जनजातीय क्षेत्रों में यह व्यापक रूप से प्रचलित है।
- उद्गम स्थल (Origin Village): झाबुआ/अलीराजपुर जिले के भाबरा ग्राम (Bhabhra Village) को पिथौरा कला का मुख्य उद्गम स्थल माना जाता है।
- गुजरात का क्षेत्र: गुजरात के छोटा उदयपुर (Chhota Udepur) तथा पंचमहल (Panchmahal) जिले।
- संबद्ध जनजातियां (Associated Tribes): मुख्य रूप से भील (Bhil), भीलाला (Bhilala), राठवा (Rathwa) तथा नायका (Nayaka) समुदाय।
- नामकरण व मान्यता: यह कला जनजातीय देवता बाबा पिथोरा / पिथोरा दे (Pithora Dev) के नाम पर है। माना जाता है कि इसे घर की दीवारों पर चित्रित करने से घर में शांति, खुशहाली, आरोग्य और सौहार्द का वास होता है।
2. पिथोरा कला के प्रमुख अनुष्ठानिक पात्र: लिखांद्र, झोकरा व बड़वा (Key Terminology & Roles)
- लिखांद्र / लखारा (Likhindra / Lakhara): पिथोरा चित्र बनाने वाले मुख्य विशेषज्ञ अनुष्ठान चित्रकारों को 'लिखांद्र' (या लखारा) कहा जाता है।
- झोकरा (Jhokhara): पिथोरा चित्रकला के दौरान लगने वाली सामग्रियों, चढ़ावे तथा अनुष्ठान का हिसाब रखने वाले व्यक्ति को 'झोकरा' (Jhokhara) कहा जाता है (MPPSC स्पेशल फैक्ट)।
- बड़वा पुजारी (Badwa Pujari): अनुष्ठान संपन्न कराने वाले सर्वोच्च पद पर आसीन आदिवासी पुजारी को 'बड़वा' (Badwa) कहा जाता है।
- धार्मिक श्रद्धा: भील व राठवा समुदाय के लोग धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं और मन्नत पूरी होने (विवाह, जन्म, फसल कटाई) पर अपने घरों में पिथोरा चित्र बनवाने में बहुत धन व संसाधन अर्पित करते हैं।

3. रंग, सामग्री एवं पारंपरिक निर्माण विधि (Natural Pigments & Binders)
- दीवार की तैयारी (Wall Plastering): घरों की भीतरी दीवारों, ओसारियों या दहलीज को पहले गाय के गोबर और मिट्टी (Cow dung & Mud) से लिपा जाता है।
- प्राकृतिक रंग (Natural Pigments): इसमें प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है:
- गेरू (Red Ochre)
- खड़िया / चूना (White Chalk/Lime)
- हल्दी (Turmeric Yellow)
- हिंगुल / सिंदूरी (Vermilion Red)
- तवे की कालिक (Stove Soot Black)
- हरा, नीला, आसमानी व चांदनी रंग
- प्राकृतिक घोलक/बाइंडर (Natural Binder): रंगों को घोलने तथा स्थायित्व देने के लिए उन्हें दूध (Milk) एवं मदिरा (Alcohol/Liquor) में घोला जाता है (विशेष परीक्षा तथ्य)।
- पारंपरिक कूँची (Brush Implements): ब्रश बनाने के लिए बेंत (Cane) या टहनी के किनारों को कूटकर कूची बनाई जाती थी, जिनका स्थान अब बाजार के ब्रशों ने ले लिया है।

4. विषय-वस्तु एवं 7 घोड़ों (7 पहाड़ियों) का प्रतीक (Motifs & Symbolism of 7 Horses)
- सात घोड़ों का प्रतीक (7 Horses = 7 Hills): इन चित्रों में पिथोरा बाबा के मुख्य प्रतीक सात घोड़े उकेरे जाते हैं, जो क्षेत्र की सात पहाड़ियों (Seven Hills of the region) को दर्शाते हैं।
- घोड़े का महत्व: घोड़ा दिव्य शक्ति, सामर्थ्य, गति और समृद्धि का सर्वोच्च प्रतीक है।
- अन्य प्रमुख विषय: देवी-देवता (गणेश जी, पिथोरी देवी, सूर्य, चंद्रमा), पशु-पक्षी (हाथी, मोर, हिरण) तथा दैनिक जीवन के दृश्य (कृषि, शिकार, ढोल-नाच, उत्सव)।

5. मध्य प्रदेश के प्रख्यात पिथोरा कलाकार: भूरी बाई व गंगू बाई (Prominent MP Artists)
- पद्म श्री भूरी बाई (Padma Shri Bhuri Bai):
- जन्म व गांव: मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के पिटोल गांव (Pitol Village) में एक भील परिवार में जन्म।
- ऐतिहासिक उपलब्धि: पारंपरिक भित्तिचित्रों (दीवारों) से बाहर निकलकर कागज और कैनवास पर चित्रकारी करने वाली भील समुदाय की पहली महिला कलाकार।
- खोज का श्रेय: भोपाल में भारत भवन (Bharat Bhavan) के निर्माण के दौरान मजदूरी करते समय प्रसिद्ध चित्रकार व निदेशक जे. स्वामीनाथन (J. Swaminathan) ने उनकी कला को पहचाना और कैनवास पर उतारने की प्रेरणा दी।
- विशिष्ट शैली: इनकी पेंटिंग की मुख्य पहचान बहु-रंगीन बिंदु (Multi-coloured dots) हैं।
- आधुनिक विषयों का समावेश: इन्होंने पारंपरिक प्रकृति व देवी-देवताओं के साथ-साथ हवाई जहाज, टेलीविजन, बस और कारों जैसी आधुनिक वस्तुओं को कला में सहजता से शामिल किया।
- पद्म श्री पुरस्कार: भारत सरकार द्वारा वर्ष 2021 में देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म श्री' प्रदान किया गया।
- गंगू बाई (Gangu Bai): भोपाल स्थित मानव संग्रहालय (Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya - IGRMS) के 'करो और सीखो' कार्यक्रम में पारम्परिक भील/पिथोरा कला का प्रशिक्षण देने वाली प्रसिद्ध कलाकार।
6. MPPSC मुख्य परीक्षा (Mains) हेतु आदर्श उत्तर ढांचा (Model Mains Answer)
- प्रश्न (MPPSC Mains 5 अंक / 50 शब्द): 'मध्य प्रदेश की पिथोरा चित्रकला की प्रमुख विशेषताओं पर टिप्पणी लिखिए।'
- आदर्श उत्तर (Model Answer):
- 1परिचय: पश्चिमी मध्य प्रदेश (झाबुआ, अलीराजपुर) के भील एवं भीलाला जनजातियों की पवित्र अनुष्ठानिक भित्ति कला।
- 2प्रतीक: मुख्य विषय 'बाबा पिथोरा', जिसमें 7 घोड़े क्षेत्र की 7 पहाड़ियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- 3कलाकार व पात्र: भित्तिचित्र निर्माता को लिखांद्र, अनुष्ठान पुरोहित को बड़वा तथा हिसाब रखने वाले को झोकरा कहते हैं।
- 4सामग्री: गोबर-मिट्टी से लिपी दीवार पर प्राकृतिक रंगों को दूध व मदिरा के घोल में मिलाकर चित्रण।
- 5प्रमुख कलाकार व उपलब्धि: पद्म श्री भूरी बाई (2021) एवं वर्ष 2026 में प्रतिष्ठित GI टैग प्राप्त।

7. भौगोलिक संकेत (GI Tag 2026) का महत्व
- प्रामाणिकता व विधिक संरक्षण: वर्ष 2026 में जीआई टैग मिलने से भील व राठवा कला की प्रामाणिकता सुरक्षित होगी।
- नकल पर रोक: बाजारों में व्यावसायिक मशीन-प्रिंट डुप्लिकेट्स पर कानूनी रोक।
- स्थायी आजीविका: झाबुआ, अलीराजपुर व छोटा उदयपुर के हजारों लिखांद्र कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय पहचान और बेहतर आय।
8. MPPSC व UPSC परीक्षा उपयोगी अति-महत्वपूर्ण तथ्य (Key Exam Summary Points)
- कला का प्रकार: भील व राठवा जनजातीय अनुष्ठानिक भित्ति चित्रकला।
- मध्य प्रदेश में केंद्र: झाबुआ, अलीराजपुर (भाबरा ग्राम), इंदौर।
- गुजरात में केंद्र: छोटा उदयपुर, पंचमहल।
- मुख्य चित्रकार (Artist): लिखांद्र / लखारा (Likhindra / Lakhara)।
- हिसाब रखने वाला (Accountant): झोकरा (Jhokhara)।
- सर्वोच्च पुजारी (Priest): बड़वा (Badwa Pujari)।
- सात घोड़ों का प्रतीक: क्षेत्र की 7 पहाड़ियां।
- रंगों का घोलक/बाइंडर: दूध एवं मदिरा (Milk & Alcohol)।
- पद्म श्री भूरी बाई (2021): पिटोल गांव (झाबुआ), कैनवास पर पहली भील महिला चित्रकार, बिंदु शैली (dot style), भारत भवन भोपाल।
- जीआई टैग वर्ष: 2026 (Geographical Indications Registry, Chennai)।
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अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
1पिथोरा चित्रकला मुख्य रूप से मध्य प्रदेश की किस जनजाति से संबंधित है?
2पिथोरा कला में भित्ति चित्र बनाने वाले विशेषज्ञ कलाकार को क्या कहा जाता है?
3पद्म श्री भूरी बाई (2021) मध्य प्रदेश के किस जिले के पिटोल गांव से संबंधित प्रसिद्ध भील चित्रकार हैं?
4मध्य प्रदेश में पिथोरा चित्रकला का मुख्य उद्गम स्थल किस गांव को माना जाता है?
5पिथोरा चित्रकला में चित्रित 7 घोड़े मुख्य रूप से किसका प्रतीक हैं?
6पिथोरा पेंटिंग में प्राकृतिक रंगों को घोलने के लिए पारंपरिक रूप से किस बाइंडर का उपयोग किया जाता है?
7भारत भवन भोपाल में भूरी बाई की कला प्रतिभा को किस चित्रकार व निदेशक ने पहचाना था?
8पिथोरा पेंटिंग को किस वर्ष भौगोलिक संकेत (GI Tag) से सम्मानित किया गया है?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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