Key Highlights
भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र (Commercial Space Sector) ने उस समय एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया जब हैदराबाद स्थित एयरोस्पेस स्टार्ट-अप स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) ने भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' (Vikram-1 Orbital Rocket) के सफल प्रक्षेपण की घोषणा की। यह रॉकेट 480 किलोग्राम पेलोड को निम्न पृथ्वी कक्षा (Low Earth Orbit - LEO) में स्थापित करने में सक्षम है। भारत सरकार द्वारा IN-SPACe (इंडियन नेशनल स्पेस संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र) के गठन के बाद यह भारत का सबसे बड़ा निजी अंतरिक्ष अभियान है। यह लेख MPPSC (Mains Paper 3 Unit 7) और UPSC (GS-3 Science & Tech) के परीक्षार्थियों हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण है。
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1. विक्रम-1 रॉकेट की प्रमुख विशेषताएँ (Quick Fact Sheet)
- निर्माता कंपनी: स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace, हैदराबाद)
- रॉकेट प्रकार: बहु-स्तरीय ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल (Multi-Stage Orbital Rocket)
- पेलोड क्षमता: 480 किग्रा (LEO - Low Earth Orbit, 500 किमी)
- मुख्य इंजन: कलाम-100 (Kalam-100 Solid Rocket Motor) एवं रमन-1 (Raman Engine)
- संरचनात्मक सामग्री: ऑल-कार्बन-फाइबर बॉडी (All-Carbon-Fiber Structure)
- नोडल एजेंसी: IN-SPACe एवं ISRO टेक्नोलॉजी ट्रांसफर
2. आधुनिक 3D-प्रिंटेड इंजन एवं कलाम सीरीज तकनीक
विक्रम-1 रॉकेट में स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन एवं सॉलिड रॉकेट मोटर्स का उपयोग किया गया है।
- कलाम-100 (Kalam-100): यह रॉकेट का मुख्य सॉलिड प्रोपल्शन स्टेज है, जिसे कार्बन-कम्पोजिट केस में 3D-प्रिंटिंग तकनीक से तैयार किया गया है।
- रमन-1 (Raman-1): यह 3D-प्रिंटेड 4-इंजन ऐरे वाला लिक्विड अपर स्टेज है, जो उपग्रहों को कक्षा में अत्यंत सटीक रूप से स्थापित (Multi-orbit insertion) करने में सक्षम है।
- इनफिनिटी कैंपस: स्काईरूट का हैदराबाद स्थित मुख्यालय 'इनफिनिटी कैंपस' एशिया की सबसे बड़ी निजी रॉकेट विनिर्माण सुविधा है।
3. IN-SPACe एवं भारतीय अंतरिक्ष 2.0 नीति का महत्व
- IN-SPACe गठन: 2020 में भारत सरकार ने गैर-सरकारी संस्थाओं (NGPEs) को ISRO की बुनियादी सुविधाओं का उपयोग करने हेतु IN-SPACe (सिंगल-विंडो नोडल एजेंसी) की स्थापना की।
- भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023: निजी कंपनियों को रॉकेट निर्माण, उपग्रह संचालन और वाणिज्यिक ग्राउंड स्टेशनों की स्थापना की पूर्ण अनुमति प्रदान करती है।
- वैश्विक न्यू-स्पेस बाज़ार: भारत वर्तमान में 8 अरब डॉलर के वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में 2% हिस्सेदारी रखता है, जिसे 2030 तक 8% से अधिक करने का लक्ष्य है।
4. MPPSC & UPSC परीक्षा दृष्टिकोण (Exam POV)
- MPPSC Mains Paper 3 Unit 7: भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी विकास, इसरो बनाम निजी अंतरिक्ष क्षेत्र, 3D प्रिंटिंग तकनीक का अनुप्रयोग तथा स्काईरूट विक्रम सीरीज।
- UPSC GS-3 (Science & Tech): इंडियन स्पेस पॉलिसी 2023, IN-SPACe का रोल, वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपण बाज़ार और न्यू-स्पेस इकोसिस्टम में मेक इन इंडिया।
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
1भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' का निर्माण किस स्टार्ट-अप द्वारा किया गया है?
2विक्रम-1 रॉकेट की निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में पेलोड क्षमता कितनी है?
3निजी अंतरिक्ष गतिविधियों को अधिकृत करने वाली नोडल एजेंसी IN-SPACe का गठन किस वर्ष हुआ था?
4विक्रम-1 के लिक्विड अपर स्टेज इंजन का नाम क्या है?
5विक्रम-1 रॉकेट की मुख्य संरचना किस सामग्री से निर्मित है?
6भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 के तहत वाणिज्यिक अंतरिक्ष संचालन का जिम्मा किसे दिया गया है?
7स्काईरूट एयरोस्पेस का विशाल रॉकेट निर्माण केंद्र 'इनफिनिटी कैंपस' कहाँ स्थित है?
8नवंबर 2022 में स्काईरूट द्वारा प्रक्षेपित भारत के पहले निजी सब-ऑर्बिटल रॉकेट का नाम क्या था?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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