प्रसंग (Context)
मध्य प्रदेश के जबलपुर के दो प्रसिद्ध कृषि उत्पादों—जबलपुरी मटर (Jabalpuri Matar) और जबलपुर सिंघाड़ा (Jabalpur Singhada)—को भारत सरकार द्वारा भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication – GI) टैग प्रदान किया गया है। चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री ने 26 जून 2026 को आधिकारिक तौर पर इन उत्पादों को जीआई जर्नल में पंजीकृत किया। देश में यह पहला अवसर है जब किसी क्षेत्र के मटर और सिंघाड़े को एक साथ जीआई टैग प्राप्त हुआ है, जिससे नर्मदा घाटी की कृषि विरासत को एक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।
जबलपुरी मटर और सिंघाड़ा की विशिष्ट विशेषताएं
जबलपुर के इन दोनों उत्पादों में अद्वितीय गुण और स्थानीय भौगोलिकता का प्रभाव पाया जाता है:
- जबलपुरी मटर (Jabalpuri Matar): नर्मदा घाटी की उपजाऊ और आर्द्र मिट्टी में उत्पादित होने के कारण इस मटर का स्वाद असाधारण रूप से मीठा होता है। यह अधिक पौष्टिक होता है और अपनी विशिष्ट गुणवत्ता के कारण काफी प्रसिद्ध है। जबलपुर का पाटन क्षेत्र मटर उत्पादन का प्रमुख केंद्र है। जबलपुर मटर केंद्र सरकार की 'एक जिला-एक उत्पाद' (ODOP) योजना का भी हिस्सा है।

- जबलपुर सिंघाड़ा (Jabalpur Singhada): जबलपुर के स्वच्छ, प्राकृतिक जलाशयों और तालाबों में इसका पारंपरिक रूप से उत्पादन किया जाता है। इसका बेहतरीन स्वाद, बड़ा आकार और उच्च पोषण स्तर इसे देश भर के बाजारों में अत्यधिक लोकप्रिय बनाते हैं।
- आवेदन प्रक्रिया (Application Journey): इन उत्पादों को जीआई टैग दिलाने में 'मैकलसुता फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी' (FPO), पाटन की मुख्य भूमिका रही। इन्होंने मटर के लिए अक्टूबर 2023 और सिंघाड़े के लिए जनवरी 2024 में आवेदन किया था। इस प्रक्रिया में मध्य प्रदेश उद्यानिकी विभाग और जीआई विशेषज्ञ 'जीआई मैन ऑफ इंडिया' पद्मश्री डॉ. रजनीकांत का विशेष योगदान रहा।

भौगोलिक संकेतक (GI Tag) के बारे में बुनियादी तथ्य
- परिचय: भौगोलिक संकेतक (GI) एक ऐसा नाम या चिह्न है जिसका उपयोग उन उत्पादों पर किया जाता है जिनकी एक विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति होती है और जिनमें उस उत्पत्ति के कारण गुण या प्रतिष्ठा होती है।
- अधिनियम: भारत में जीआई पंजीकरण 'माल का भौगोलिक उपदर्शन (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999' के तहत विनियमित होता है, जो 15 सितंबर 2003 से लागू हुआ।
- प्राधिकरण: इसका पंजीकरण भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री, चेन्नई द्वारा किया जाता है। यह वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के अधीन काम करता है।
- वैधता: जीआई टैग पंजीकरण 10 वर्षों के लिए वैध होता है, जिसे बाद में नवीनीकृत किया जा सकता है।
जीआई टैग से किसानों को मिलने वाले लाभ
- कानूनी संरक्षण: नकली और मिलावटी उत्पादों की बिक्री पर रोक लगती है। केवल जबलपुर नर्मदा क्षेत्र के किसान ही इन विशिष्ट नामों का उपयोग कर सकेंगे।
- आर्थिक लाभ: राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांड वैल्यू बढ़ने से उत्पादों को अधिक मूल्य प्राप्त होगा, जिससे किसानों की आय में सुधार होगा।
- निर्यात में वृद्धि: जैविक कृषि को बढ़ावा मिलेगा, जिससे यूरोपीय और मध्य-पूर्वी देशों में निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी।
- स्थानीय रोजगार: स्थानीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों (Food Processing Units) का विकास होगा जिससे ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिलेगा।
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
1भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त करने वाले 'जबलपुरी मटर' और 'जबलपुर सिंघाड़ा' किस राज्य से संबंधित हैं?
2भारत में भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री (GI Registry) कहाँ स्थित है?
3जीआई (Geographical Indication) टैग की सामान्य वैधता अवधि कितने वर्षों की होती है?
4मध्यप्रदेश का कौन-सा विकासखंड (Block) उत्तम गुणवत्ता वाले 'जबलपुर मटर' (Jabalpur Pea) के उत्पादन के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है?
5नर्मदा घाटी के जबलपुर क्षेत्र में मटर की खेती के लिए किस प्रकार की मिट्टी सर्वाधिक उपयुक्त पाई जाती है?
6जबलपुर का प्रसिद्ध सिंघाड़ा (Water Chestnut) मुख्य रूप से किस प्रकार के जल निकायों में उगाया जाता है?
7कृषि उत्पादों को मिलने वाले भौगोलिक संकेतक (GI Tag) से स्थानीय किसानों को क्या मुख्य लाभ प्राप्त होता है?
8औद्योगिक संपत्ति के संरक्षण के लिए किस अंतरराष्ट्रीय संधि के तहत भौगोलिक संकेतक (GI) बौद्धिक संपदा का हिस्सा बना?





