प्रसंग (Context)
मध्य प्रदेश की चार पारंपरिक आदिवासी फसलों को भौगोलिक संकेत (Geographical Indication - GI) टैग प्रदान किया गया है। यह सम्मान इन फसलों की विशिष्ट गुणवत्ता, भौगोलिक पहचान, पारंपरिक खेती और आदिवासी विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी, जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन उत्पादों की पहचान मजबूत होगी।
GI टैग प्राप्त फसलों का विस्तृत विवरण
मध्य प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों से संबंधित चारों फसलों का विवरण निम्न प्रकार है:
- सीताही कुटकी (Sitahi Kutki): डिंडोरी जिले में मुख्य रूप से बैगा एवं गोंड जनजातियों द्वारा उगाई जाने वाली एक लघु अनाज (Millet) फसल है। यह अत्यधिक पौष्टिक, मोटा अनाज है जो कम वर्षा और सूखा सहन करने में सक्षम है।
- नागदमन कुटकी (Nagdaman Kutki): यह भी डिंडोरी जिले की बैगा एवं गोंड जनजातियों द्वारा उगाई जाने वाली एक पारंपरिक वर्षा-आधारित मिलेट फसल है। यह आदिवासी समुदाय का प्रमुख खाद्यान्न रहा है और इसका पोषण स्तर बहुत उच्च है।

- बैगानी अरहर (Baigani Arhar): डिंडोरी जिले की बैगा जनजाति की एक पारंपरिक अरहर (तूर दाल) की किस्म है। इसकी खेती रासायनिक उर्वरकों या कीटनाशकों के बिना पूरी तरह जैविक तरीके से की जाती है, जिसके कारण इसका स्वाद और पौष्टिकता उत्कृष्ट होती है।
- महाकोशल छत्रिया चावल (Chhatriya Dhan): जबलपुर और कटनी जिलों में उगाई जाने वाली धान की एक पारंपरिक किस्म है। यह अपनी अनूठी सुगंध, बेहतर स्वाद, उच्च गुणवत्ता और स्थानीय जलवायु परिस्थितियों के प्रति अनुकूलता के लिए जानी जाती है।
GI टैग प्राप्त चारों फसलों का तुलनात्मक अवलोकन
| फसल (Crop) | उत्पादक क्षेत्र | प्रमुख जनजाति | विशेषताएं एवं लाभ |
|---|---|---|---|
| सीताही कुटकी | डिंडोरी | बैगा एवं गोंड | सूखा रोधी लघु धान्य (मोटा अनाज), उच्च लौह तत्व (Iron) व पोषण |
| नागदमन कुटकी | डिंडोरी | बैगा एवं गोंड | वर्षा आधारित खेती, फाइबर युक्त औषधीय व पोषण गुण |
| बैगानी अरहर | डिंडोरी | बैगा जनजाति | बिना रसायनों के पारंपरिक जैविक दाल, लाजवाब स्वाद |
| महाकोशल छत्रिया चावल | जबलपुर एवं कटनी | स्थानीय समुदाय | सुगंधित चावल, स्थानीय पर्यावरण के अनुकूल, उच्च उत्पादकता |
जीआई (Geographical Indication) का सामान्य परिचय
जीआई (Geographical Indication) एक ऐसा बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) है जो किसी उत्पाद की विशिष्ट गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या पहचान को उसके विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से जोड़ता है।
- कानून: वस्तुओं का भौगोलिक उपदर्शन (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 (Geographical Indications of Goods Act, 1999)
- प्रभावी तिथि: 15 सितम्बर 2003 से लागू।
- पंजीकरण प्राधिकरण: भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री (GI Registry), चेन्नई (तमिलनाडु)।
- शासी संगठन: Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार।
जीआई टैग के प्रमुख लाभ
- स्थानीय उत्पादों को विशिष्ट राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना।
- बाजार में नकली और गैर-भौगोलिक उत्पादों के विक्रय पर पूर्ण रोक।
- उत्पादों के लिए बेहतर बाजार मूल्य सुनिश्चित करना, जिससे कृषि आय में वृद्धि हो।
- आदिवासी समुदायों के पारंपरिक कृषि ज्ञान, बीजों की किस्मों और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण।
- जैविक कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाना।
मध्य प्रदेश के प्रमुख GI टैग उत्पाद (Exam Revision)
एमपीपीएससी और राज्य स्तरीय परीक्षाओं हेतु मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक और नवीनतम पंजीकृत जीआई उत्पादों का विवरण:
| उत्पाद (GI Product) | श्रेणी (Category) | प्रमुख क्षेत्र/जिल्हा |
|---|---|---|
| चंदेरी साड़ी | हथकरघा वस्त्र | अशोकनगर |
| महेश्वरी साड़ी | हथकरघा वस्त्र | खरगोन |
| बाघ प्रिंट | हस्तशिल्प | धार |
| रतलामी सेव | खाद्य उत्पाद | रतलाम |
| कड़कनाथ मुर्गा | जीवित उत्पाद | झाबुआ |
| चिन्नौर चावल | कृषि उत्पाद | बालाघाट |
| खजुराहो मेटल क्राफ्ट | हस्तशिल्प |
बैगा एवं गोंड जनजाति: एक परिचय
इन फसलों का उत्पादन मुख्य रूप से मध्य प्रदेश की दो ऐतिहासिक जनजातियों द्वारा किया जाता है:
- बैगा जनजाति (Baiga Tribe): यह भारत सरकार द्वारा घोषित 'विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह' (PVTG) है। ये मुख्य रूप से डिंडोरी, मंडला और बालाघाट जिलों में निवास करते हैं और पारंपरिक रूप से रासायनिक खादों के बिना प्राकृतिक खेती करते हैं।
- गोंड जनजाति (Gond Tribe): यह भारत और मध्य प्रदेश की विशालतम जनजातियों में से एक है। ये अपनी कला, संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए जाने जाते हैं।

वन-लाइनर रिवीजन (One Liner Revision)
- मध्य प्रदेश की 4 नई आदिवासी फसलों को GI टैग प्रदान किया गया है।
- डिंडोरी जिले से संबंधित सीताही कुटकी, नागदमन कुटकी और बैगानी अरहर को GI दर्जा मिला।
- जबलपुर और कटनी से संबंधित महाकोशल छत्रिया चावल (छत्रिया धान) को GI मान्यता दी गई।
- बैगा जनजाति भारत सरकार द्वारा घोषित एक PVTG (विशेष पिछड़ी जनजाति) है।
- भारत में जीआई कानून वर्ष 1999 में पारित हुआ और 15 सितंबर 2003 को लागू हुआ।
- भारत का पहला जीआई उत्पाद दार्जिलिंग चाय (2004-05) है, और जीआई रजिस्ट्री चेन्नई में है।
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
1हाल ही में मध्य प्रदेश की कितनी आदिवासी फसलों को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्राप्त हुआ?
2जीआई टैग प्राप्त 'सीताही कुटकी' और 'नागदमन कुटकी' मध्य प्रदेश के किस जिले से संबंधित हैं?
3'बैगानी अरहर' (तूर दाल) मध्य प्रदेश की किस जनजाति की पारंपरिक कृषि विरासत का हिस्सा है?
4हाल ही में जीआई मान्यता प्राप्त 'महाकोशल छत्रिया चावल' मुख्यतः किन जिलों में उत्पादित किया जाता है?
5भारत में जीआई (GI) रजिस्ट्री का मुख्यालय कहाँ स्थित है?
6भारत में वस्तुओं का भौगोलिक उपदर्शन (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम किस वर्ष पारित किया गया था?
7जीआई (GI) टैग की वैधता अवधि कितने वर्ष होती है?
8निम्नलिखित में से कौन-सा जीआई टैग प्राप्त उत्पाद मध्य प्रदेश से संबंधित नहीं है?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेख के स्रोत
3 स्रोत
लेख के स्रोत
3 स्रोत





