Key Highlights
1. स्वतंत्रता पश्चात भारत में जनसंख्या नीति का ऐतिहासिक विकास (1952 से 2000)

भारत दुनिया का पहला ऐसा देश है जिसने सबसे पहले वर्ष 1952 में राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम (National Family Planning Programme) को अपनाया। स्वतंत्रता के बाद प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951–56) में ही तीव्र गति से बढ़ती आबादी को देश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास के बाधक के तौर पर चिन्हित किया गया था। तभी से विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं में जनसंख्या नियंत्रण एवं परिवार कल्याण के लिए निरंतर प्रयास किए जाते रहे हैं।
- 1960 की विशेषज्ञ समिति: भारत में सबसे पहले एक समर्पित जनसंख्या नीति बनाने का औपचारिक सुझाव वर्ष 1960 में गठित एक विशेषज्ञ समूह ने दिया था।
- पहली राष्ट्रीय जनसंख्या नीति (1976): वर्ष 1976 में देश की पहली औपचारिक राष्ट्रीय जनसंख्या नीति की घोषणा की गई (बाद में 1981 में इसमें कुछ संशोधन किए गए)। इस नीति के मुख्य लक्ष्य जन्म दर में कमी लाना, विवाह की न्यूनतम आयु में वृद्धि (लड़कियों हेतु 18 वर्ष व लड़कों हेतु 21 वर्ष), परिवार नियोजन को प्रोत्साहित करना और महिला शिक्षा पर विशेष जोर देना था।
- राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000 (NPP-2000): फरवरी 2000 में भारत सरकार ने नई राष्ट्रीय जनसंख्या नीति की घोषणा की। यह नीति प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक 👉 डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन (जीवन परिचय व हरित क्रांति नोट्स) की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ दल की रिपोर्ट पर आधारित थी। इसका मुख्य उद्देश्य प्रजनन तथा शिशु स्वास्थ्य देखभाल हेतु बुनियादी ढाँचा मजबूत करना तथा दीर्घकालिक लक्ष्य वर्ष 2045 तक जनसंख्या में स्थायित्व प्राप्त करना है।
- काहिरा मॉडल (Cairo Model 1996): आबादी पर काबू पाने के लिहाज़ से भारत में वर्ष 1996 से काहिरा मॉडल लागू है। इसके तहत आबादी घटाने के लिए आम जनता पर किसी प्रकार का दबाव या जबरदस्ती नहीं डाली जाती, बल्कि शिक्षा व जन-जागरूकता के ज़रिए उनमें छोटे परिवार का अहसास जगाया जाता है। वर्तमान में संपूर्ण विश्व में यही काहिरा मॉडल लागू है।
2. राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग एवं राष्ट्रीय जनसंख्या स्थिरता कोष

मई 2000 में भारत के प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग (National Commission on Population) का गठन किया गया। इस आयोग के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
- 1. नीति समीक्षा: राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के क्रियान्वयन की समय-समय पर समीक्षा करना।
- 2. निगरानी एवं निर्देशन: जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों की निगरानी करना और आवश्यक नीतिगत दिशा-निर्देश देना।
- 3. अंतर-क्षेत्रीय सहक्रिया: स्वास्थ्य, शैक्षणिक, पर्यावरणीय और विकास कार्यक्रमों के मध्य सहक्रिया (Synergy) को बढ़ावा देना।
- 4. संस्थागत तालमेल: कार्यक्रमों की योजना बनाने व क्रियान्वयन करने में अंतर-क्षेत्रीय (Inter-sectoral) तालमेल स्थापित करना।
3. भारत में जनगणना 2011 एवं स्वास्थ्य सर्वे के महत्वपूर्ण आंकड़े
| जनसांख्यिकीय मापदंड / सूचकांक | प्रामाणिक आंकड़ा (Census 2011 / NFHS) |
|---|---|
| भारत की कुल जनसंख्या (2011) | 1,21,08,54,977 (121.08 करोड़) |
| पुरुष जनसंख्या की हिस्सेदारी | 51.47% |
| महिला जनसंख्या की हिस्सेदारी | 48.53% |
| 0–6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की हिस्सेदारी | 13.6% |
| दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर (2001–2011) | 17.7% |
| वार्षिक जनसंख्या वृद्धि दर |
4. भारत में जनसंख्या वृद्धि के मुख्य कारण
- 1. जीवन प्रत्याशा में वृद्धि: आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं एवं टीकाकरण के कारण मृत्यु दर में गिरावट व औसत जीवन प्रत्याशा बढ़ी।
- 2. परिवार नियोजन एवं साधनों की कमी: ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों में गर्भनिरोधक साधनों की सीमित पहुँच।
- 3. बाल विवाह: कम उम्र में विवाह से महिलाओं की प्रजनन अवधि लंबी हो जाती है।
- 4. अशिक्षा एवं जागरूकता का अभाव: विशेष रूप से महिला साक्षरता की कमी।
- 5. धार्मिक कारण एवं रूढ़िवादिता: पुत्र प्राप्ति की लालसा व भ्रांतियाँ।
- 6. गरीबी: निर्धन परिवारों में बच्चों को कमाई के अतिरिक्त साधन के रूप में देखना।
- 7. अवैध प्रवास (Illegal Migration): सीमावर्ती राज्यों में जनसंख्या का दबाव।
5. जनसंख्या वृद्धि के सकारात्मक पहलू एवं जनसांख्यिकीय लाभांश

- 1. जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend): भारत में लगभग 50% आबादी 25 वर्ष से कम आयु की है जो आर्थिक विकास की रीढ़ है।
- 2. मानव संसाधन में बढ़ोतरी (Human Capital): कुशल श्रम व तकनीक का वैश्विक निर्यात।
- 3. विशाल घरेलू बाजार: प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) व उपभोक्ता बाजार।
- 4. शक्तिशाली सैन्य बल: विशाल मानव संसाधन से मजबूत सैन्य क्षमता।
6. जनसंख्या विस्फोट के नुकसान एवं गंभीर सामाजिक-आर्थिक चुनौतियाँ
- 1. बेरोजगारी (Unemployment): रोजगार के अवसरों के सृजन की चुनौती।
- 2. खाद्य सुरक्षा एवं कुपोषण: खाद्यान्न मांग व बाल कुपोषण।
- 3. प्रति व्यक्ति आय व निर्धनता: प्रति व्यक्ति आय में कमी व महंगाई।
- 4. बुनियादी ढाँचे पर बोझ: स्वास्थ्य, आवास व शिक्षा पर वित्तीय दबाव।
7. संविधान समीक्षा आयोग (NCRWC) की सिफारिशें एवं जनसंख्या नियंत्रण कानून
- अनुच्छेद 47A का समावेश: NCRWC (जस्टिस वेंकटचेलैया आयोग) ने नीति निर्देशक तत्वों में अनुच्छेद 47A जोड़ने व जनसंख्या कानून बनाने का सुझाव दिया।
- दो बच्चों का नियम: जनहित याचिका में दो बच्चों का नियम लागू करने का सुझाव।
8. जनसंख्या स्थायित्व हेतु भावी राह एवं आवश्यक उपाय
- 1. महिला शिक्षा व सशक्तिकरण: महिला साक्षरता द्वारा परिवार नियोजन जागरूकता।
- 2. विवाह की उम्र का कड़ाई से पालन: बाल विवाह रोकथाम।
- 3. स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: संस्थागत प्रसव व आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका।
9. MPPSC एवं UPSC परीक्षा हेतु त्वरित स्मरणीय बिंदु
10. संबंधित अध्ययन सामग्री एवं नोट्स
👉 डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन: जीवन परिचय, हरित क्रांति के जनक, 50% MSP व योगदान
👉 अंतर्राष्ट्रीय संगठन एवं उनके मुख्यालय: संपूर्ण सूची, स्थापना वर्ष व रिपोर्ट्स
👉 आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम 2025: NCMC, UDMA धारा 41A व MPPSC Notes
👉 आपदा प्रबंधन क्या है? NCERT सिद्धांत व मेन्स उत्तर लेखन नोट्स
11. निष्कर्ष
भारत की जनसंख्या नीति केवल जन्म दर को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव पूंजी निर्माण, शिक्षा, महिला अधिकार एवं सतत विकास से जुड़ी एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति है। काहिरा मॉडल के सिद्धांतों व डॉ. स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों के अनुरूप शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से ही भारत अपनी विशाल जनसंख्या को जनसांख्यिकीय लाभांश में परिवर्तित कर सकता है।
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
1भारत में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर परिवार नियोजन कार्यक्रम किस वर्ष शुरू किया गया था?
2राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 का मसौदा किस विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर आधारित था?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेख के स्रोत
3 स्रोत
लेख के स्रोत
3 स्रोत



