चर्चा में क्यों?
वर्ष 1992 में पारित 73वें एवं 74वें संविधान संशोधन अधिनियमों ने भारत में स्थानीय स्वशासन (Local Self Government) को संवैधानिक दर्जा दिया। इस व्यवस्था ने भारतीय लोकतंत्र को जमीनी स्तर (Grassroots Level) पर मजबूत करने का कार्य किया है।
हाल ही में पंचायती राज और शहरी स्थानीय निकायों की संवैधानिक स्थापना के तीन दशक पूरे होने के संदर्भ में इसके प्रभाव एवं मूल्यांकन पर व्यापक चर्चा हो रही है। यह विषय लोक सेवा आयोग परीक्षाओं (UPSC & State PSCs) के मुख्य परीक्षा (Mains) एवं प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) दोनों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 (पंचायती राज)
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि व महत्वपूर्ण तिथियाँ:
- लोकसभा से पारित: 22 दिसंबर 1992
- राज्यसभा से पारित: 23 दिसंबर 1992
- राष्ट्रपति की स्वीकृति: 20 अप्रैल 1993
- अधिनियम लागू होने की तिथि: 24 अप्रैल 1993 (इसीलिए प्रतिवर्ष 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है)
- तत्कालीन राष्ट्रपति: डॉ. शंकर दयाल शर्मा | तत्कालीन प्रधानमंत्री: पी. वी. नरसिम्हा राव

- प्रमुख संवैधानिक प्रावधान:
- संविधान में नया भाग-IX (Part IX) जोड़ा गया।
- इसके तहत अनुच्छेद 243 से 243O (Articles 243-243O) जोड़े गए।
- संविधान में 11वीं अनुसूची (11th Schedule) जोड़ी गई, जिसमें पंचायतों को 29 कार्यक्षेत्र विषय (29 Functional Subjects) सौंपे गए।
- त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था:
1. Gram Panchayat (ग्राम स्तर पर)
2. जनपद पंचायत / पंचायत समिति (खंड या मध्यवर्ती स्तर पर)
3. जिला पंचायत (जिला स्तर पर)
- विशेष तथ्य: मध्यप्रदेश इस ऐतिहासिक 73वें संविधान संशोधन अधिनियम को प्रभावी रूप से लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना था।
74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 (शहरी स्थानीय निकाय)
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि व महत्वपूर्ण तिथियाँ:
- लोकसभा से पारित: 22 दिसंबर 1992
- राज्यसभा से पारित: 23 दिसंबर 1992
- राष्ट्रपति की स्वीकृति: 20 अप्रैल 1993
- अधिनियम लागू होने की तिथि: 1 जून 1993

- प्रमुख संवैधानिक प्रावधान:
- संविधान में नया भाग-IXA (Part IXA) जोड़ा गया।
- इसके तहत अनुच्छेद 243P से 243ZG (Articles 243P-243ZG) जोड़े गए।
- संविधान में 12वीं अनुसूची (12th Schedule) जोड़ी गई, जिसमें नगर निकायों को 18 कार्यक्षेत्र विषय (18 Functional Subjects) सौंपे गए।
- शहरी निकायों का त्रिस्तरीय वर्गीकरण:
1. नगर पंचायत (ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में संक्रमणशील क्षेत्रों के लिए)
2. नगर पालिका परिषद (छोटे शहरी क्षेत्रों के लिए)
3. नगर निगम (बड़े महानगरीय/शहरी क्षेत्रों के लिए)
73वें एवं 74वें संशोधन में तुलनात्मक अंतर
- 73वाँ संविधान संशोधन (ग्रामीण स्थानीय स्वशासन):
- शासन प्रकार: ग्रामीण स्थानीय स्वशासन (Panchayati Raj)
- जोड़ा गया भाग: भाग-IX
- जोड़ी गई अनुसूची: 11वीं अनुसूची
- कुल कार्यक्षेत्र विषय: 29 विषय (जैसे कृषि, पेयजल, भूमि सुधार)
- 74वाँ संविधान संशोधन (नगरीय स्थानीय स्वशासन):
- शासन प्रकार: नगरीय स्थानीय स्वशासन (Municipalities)
- जोड़ा गया भाग: भाग-IXA
- जोड़ी गई अनुसूची: 12वीं अनुसूची
- कुल कार्यक्षेत्र विषय: 18 विषय (जैसे शहरी नियोजन, सड़कें, जल आपूर्ति)
याद रखने की शॉर्ट ट्रिक व महत्वपूर्ण अनुच्छेद
- याद रखने की ट्रिक (Memory Trick):
"11-29 गाँव, 12-18 शहर"
- 11वीं अनुसूची = 29 विषय = ग्रामीण पंचायत
- 12वीं अनुसूची = 18 विषय = शहरी नगर निकाय
- परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले अनुच्छेद:
- अनुच्छेद 243A: ग्राम सभा (Gram Sabha)
- अनुच्छेद 243B: पंचायतों का गठन (Constitution of Panchayats)
- अनुच्छेद 243D: सीटों का आरक्षण (Reservation of Seats) - महिलाओं के लिए 1/3 सीटों का आरक्षण अनिवार्य।
- अनुच्छेद 243I: राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) का गठन।
- अनुच्छेद 243K: राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) का गठन।
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
173वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में कौन-सा भाग जोड़ा गया?
274वें संविधान संशोधन द्वारा कौन-सी अनुसूची जोड़ी गई?
311वीं अनुसूची में कितने विषय शामिल हैं?
4नगर निकायों से संबंधित विषय किस अनुसूची में हैं?
5राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस कब मनाया जाता है?
673वें और 74वें संविधान संशोधन के संबंध में निम्न कथनों पर विचार कीजिए: 1. 73वें संविधान संशोधन द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया। 2. 74वें संविधान संशोधन द्वारा 12वीं अनुसूची जोड़ी गई।





