चर्चा में क्यों? (Context)
महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए भारत में समय-समय पर कई महत्वपूर्ण कानून बनाए गए हैं। ये अधिनियम महिलाओं को घरेलू हिंसा, दहेज, कार्यस्थल पर उत्पीड़न, अश्लील चित्रण, यौन अपराध और विवाह संबंधी अन्याय से कानूनी संरक्षण प्रदान करते हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, MPPSC, SSC) के लिए इन कानूनों का वर्ष, उद्देश्य, प्रमुख प्रावधान और उनसे जुड़े ऐतिहासिक न्यायालयी निर्णय (जैसे विशाखा वाद 1997) अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
| विवरण / अधिनियम | जानकारी (वर्ष/विवरण) |
|---|---|
| दहेज प्रतिषेध अधिनियम | 1961 – दहेज लेने-देने पर रोक |
| महिलाओं का अशिष्ट चित्रण (निषेध) अधिनियम | 1986 – महिलाओं के अश्लील चित्रण पर रोक |
| घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम | 2005 – घरेलू हिंसा से कानूनी सुरक्षा |
| कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम | 2013 – सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करना |
| मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम | 2019 – तीन तलाक को अपराध घोषित करना |
दहेज प्रतिषेध (1961) एवं अशिष्ट चित्रण निषेध अधिनियम (1986)
1. दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961
- मुख्य उद्देश्य: समाज से दहेज प्रथा को समाप्त करना तथा दहेज लेने-देने पर रोक लगाना।
- दंडनीय अपराध: विवाह के संबंध में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दहेज मांगना, देना या लेना कानूनन दंडनीय अपराध है।
- दहेज मांगना: विवाह के पूर्व, दौरान या बाद में वर या वधू पक्ष से दहेज की मांग करना गंभीर अपराध है, जिसके लिए कारावास एवं जुर्माना दोनों का प्रावधान है।
- दहेज लेना: विवाह के समय लिए जाने वाले अनधिकृत उपहार भी दहेज की श्रेणी में आते हैं।
- महिलाओं के अधिकार: वधू को मिले उपहारों (स्त्रीधन) पर उसका पूर्ण कानूनी अधिकार होता है।
घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005
घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 घरेलू दायरे के भीतर महिलाओं को किसी भी प्रकार की हिंसा या दुर्व्यवहार से बचाने के लिए एक मील का पत्थर है। यह सिविल कानून होने के बावजूद त्वरित राहत प्रदान करता है।
घरेलू हिंसा में शामिल श्रेणियां
- शारीरिक हिंसा: मारना-पीटना, धक्का देना, चोट पहुंचाना या शारीरिक पीड़ा देना।
- मानसिक व भावनात्मक उत्पीड़न: गाली देना, अपमानित करना, चरित्र पर लांछन लगाना या धमकी देना।
- आर्थिक शोषण: महिला के वित्तीय संसाधनों को छीनना, बुनियादी जरूरतों से वंचित करना, या स्त्रीधन/वेतन का जबरन नियंत्रण।
- यौन हिंसा: महिला की सहमति के बिना उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाले यौन व्यवहार के लिए मजबूर करना।
अधिनियम के विशेष प्रावधान
कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (POSH Act, 2013)
यह कानून कामकाजी महिलाओं के लिए एक सुरक्षित, लैंगिक-समान और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर है।
- Full Form: POSH का अर्थ Prevention of Sexual Harassment (यौन उत्पीड़न की रोकथाम) है।
- अधिनियम का आधार: यह अधिनियम सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय विशाखा बनाम राजस्थान राज्य (1997) में दिए गए दिशा-निर्देशों पर आधारित है।
- Internal Committee (IC): प्रत्येक संगठन या कार्यालय जिसमें 10 या अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां एक Internal Committee (IC) का गठन अनिवार्य है, जिसकी अध्यक्षता एक वरिष्ठ महिला कर्मचारी करेगी।
- Local Committee: जिन संस्थानों में 10 से कम कर्मचारी हैं या शिकायत स्वयं नियोक्ता के खिलाफ है, वहां जिला स्तर पर Local Committee सुनवाई करेगी।
मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019
- मुख्य उद्देश्य: तत्काल तीन तलाक (Triple Talaq) पर रोक लगाना।
- Triple Talaq: तत्काल तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) बोलना चाहे वह मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हो, कानूनन अवैध एवं शून्य (Void) घोषित किया गया है।
- दंड: तत्काल तीन तलाक देने वाले पति के लिए तीन वर्ष तक के कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
- भरण-पोषण: पीड़ित पत्नी को अपने और अपने आश्रित बच्चों के लिए भरण-पोषण प्राप्त करने का अधिकार है।
- अभिरक्षा: पीड़ित महिला को अपने नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा (Custody) पाने का अधिकार है।

पॉक्सो (POCSO) संशोधन अधिनियम, 2019
यह कानून बच्चों को यौन शोषण, यौन उत्पीड़न और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- Full Form: POCSO का अर्थ Protection of Children from Sexual Offences Act है।
- मूल अधिनियम: यह मूल रूप से वर्ष 2012 में लागू किया गया था।
- संशोधन: इसे और अधिक कड़ा बनाने के लिए वर्ष 2019 में संशोधित किया गया।
- मुख्य उद्देश्य: 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन अपराधों से कड़ी सुरक्षा प्रदान करना (जेंडर-तटस्थ कानून)।
- कठोर दंड: गंभीर यौन हमले के मामलों में न्यूनतम 20 वर्ष के कारावास से लेकर मृत्युदंड (Death Penalty) का प्रावधान किया गया है।
महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण अधिनियम
- सती निषेध अधिनियम, 1987: सती प्रथा के महिमामंडन और इस अमानवीय कृत्य को पूरी तरह से प्रतिबंधित करता है।
- बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006: बाल विवाह को रोकने के लिए कानूनी उपाय। इसके तहत लड़कियों की विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित है।
- मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961: कामकाजी महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान और बाद में सवैतनिक अवकाश (Maternity Leave) प्रदान करता है।
- समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976: समान कार्य के लिए पुरुष और महिला श्रमिकों को समान वेतन सुनिश्चित करता है।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023: आईपीसी (IPC) का स्थान लेने वाली इस नई संहिता में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों (बलात्कार, झूठे वादे पर यौन संबंध) के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं।
परीक्षा दृष्टिकोण (Exam POV)
याद रखने योग्य महत्वपूर्ण वर्ष
- 1961 → दहेज प्रतिषेध अधिनियम
- 1986 → महिलाओं का अशिष्ट चित्रण (निषेध) अधिनियम
- 2005 → घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम
- 2013 → POSH Act (कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम)
- 2019 → मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम
- 2019 → POCSO संशोधन अधिनियम
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
1दहेज प्रतिषेध अधिनियम कब लागू हुआ?
2POSH अधिनियम किससे संबंधित है?
3POCSO अधिनियम किसके संरक्षण के लिए बनाया गया है?
4घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम किस वर्ष लागू हुआ?
5तीन तलाक (तत्काल) को अपराध घोषित करने वाला अधिनियम कौन-सा है?
6विशाखा बनाम राजस्थान राज्य (1997) मामला किससे संबंधित है?
7पॉक्सो (POCSO) संशोधन अधिनियम, 2019 के तहत गंभीर यौन हमले के मामलों में अधिकतम क्या सजा दी जा सकती है?
8समान पारिश्रमिक अधिनियम (Equal Remuneration Act) किस वर्ष पारित किया गया था?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेख के स्रोत
3 स्रोत
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