चर्चा में क्यों? (Why in News?)
भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश का पहला निजी ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल 'विक्रम-1' सफलतापूर्वक लॉन्च किया। हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) द्वारा विकसित इस रॉकेट ने श्रीहरिकोटा स्थित इसरो (ISRO) के लॉन्च पैड से उड़ान भरकर कई टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन पेलोड को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित किया। यह उपलब्धि भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग और आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
- भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट: 'विक्रम-1' सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।
- विकासकर्ता: Skyroot Aerospace (हैदराबाद आधारित स्पेसटेक कंपनी)।
- लॉन्च स्थल: सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC), श्रीहरिकोटा।
- मिशन का नाम: Mission Agaman (मिशन आगमन)।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट | विक्रम-1 |
| निर्माता | Skyroot Aerospace |
| लॉन्च स्थल | सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC), श्रीहरिकोटा |
| मिशन का नाम | Mission Agaman |
| उद्देश्य | छोटे एवं मध्यम आकार के उपग्रहों को LEO में स्थापित करना |
विक्रम-1 क्या है और इसकी विशेषताएँ?
- पहचान: विक्रम-1 भारत का पहला Private Commercial Orbital Launch Vehicle (निजी व्यावसायिक कक्षीय प्रक्षेपण यान) है।
- उद्देश्य: इसे छोटे एवं मध्यम आकार के उपग्रहों (Small Satellites) को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit - LEO) में स्थापित करने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है।
- नामकरण: इस रॉकेट का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थापना वर्ष (Skyroot) | 2018 |
| मुख्यालय | हैदराबाद |
| ऊँचाई | लगभग 20 मीटर |
विक्रम-1 की आधुनिक तकनीक
विक्रम-1 में अत्याधुनिक एरोस्पेस तकनीक का प्रयोग किया गया है जो इसे लागत प्रभावी और हल्का बनाती है:
1. 3D Printed Liquid Engine
- वजन: पारंपरिक रूप से बने इंजनों से यह लगभग 50% हल्का है।
- लाभ: विनिर्माण समय एवं निर्माण लागत को बेहद कम करता है।
2. Carbon Composite Structure (कार्बन कम्पोजिट संरचना)
- संरचना: रॉकेट का ढांचा पूर्णतः हल्के और अत्यधिक मजबूत कार्बन फाइबर कंपोजिट से बना है।
- लाभ: यान का वजन कम करके ईंधन दक्षता को कई गुना बढ़ा देता है।
3. Solid Fuel Booster (ठोस ईंधन बूस्टर)
- विशेषता: उच्च प्रदर्शन क्षमता वाला कार्बन फाइबर-आधारित ठोस रॉकेट मोटर जो शुरुआती थ्रस्ट प्रदान करता है।

मिशन आगमन एवं भेजे गए पेलोड
- कुल पेलोड: 'मिशन आगमन' के तहत कुल 6 पेलोड को सफलतापूर्वक लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित किया गया।
- भारतीय पेलोड्स: भारत के विभिन्न संस्थानों और स्टार्टअप द्वारा निर्मित 5 टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन पेलोड।
- अंतरराष्ट्रीय पेलोड: जर्मनी की DQBED GmbH का 1 पेलोड।
- विशेष पेलोड: इस मिशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक डिजिटल पोस्टकार्ड भी अंतरिक्ष में भेजा गया, जो देश की डिजिटल क्रांति का प्रतीक है।
स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) एवं इन्फिनिटी कैंपस
- स्थापना: वर्ष 2018।
- संस्थापक: पवन कुमार चंदना एवं नागा भरत डाका (दोनों भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन - ISRO के पूर्व वैज्ञानिक रहे हैं)।
- इन्फिनिटी कैंपस (Infinity Campus): हैदराबाद में स्थित स्काईरूट का यह एकीकृत मुख्यालय लगभग 2 लाख वर्ग फुट में फैला हुआ है। इसका उद्घाटन वर्ष 2025 में किया गया था। यहाँ रॉकेट का डिजाइन, असेंबली और परीक्षण एक ही स्थान पर किया जाता है।
- निजी स्पेसटेक यूनिकॉर्न: स्काईरूट एयरोस्पेस वर्ष 2026 में भारत की पहली निजी स्पेसटेक यूनिकॉर्न (SpaceTech Unicorn) कंपनी बन गई।

विक्रम-एस (Vikram-S) और विक्रम-1 में अंतर
- विक्रम-एस (Vikram-S):
- 18 नवंबर 2022 को सफलतापूर्वक लॉन्च।
- पहला कदम: यह भारत का पहला निजी सब-ऑर्बिटल रॉकेट (Sub-Orbital Rocket) था।
- मिशन: Mission Prarambh (मिशन प्रारंभ)।
- प्रदर्शन: इसने 88.8 किमी की ऊँचाई हासिल की और 3 पेलोड को अंतरिक्ष की दहलीज तक ले गया।
- विक्रम-2 (Vikram-2): स्काईरूट ने घोषणा की है कि अधिक क्षमता वाले विक्रम-2 रॉकेट का प्रक्षेपण वर्ष 2027 में किया जाएगा। यह LEO में 900 किलोग्राम और SSO में 600 किलोग्राम पेलोड भेजने में सक्षम होगा।
| विवरण | विक्रम-एस | विक्रम-1 |
|---|---|---|
| रॉकेट प्रकार | Sub-Orbital Rocket |
अंतरिक्ष कक्षाएँ एवं भारत का निजी अंतरिक्ष सुधार
1. लो अर्थ ऑर्बिट (Low Earth Orbit - LEO)
- परिभाषा: पृथ्वी की सतह से लगभग 160 से 2000 किमी की ऊँचाई पर स्थित कक्षा।
- उपयोग: यहाँ मुख्य रूप से मौसम पूर्वानुमान, संचार, मैपिंग और रिमोट सेंसिंग उपग्रह तथा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) स्थापित किए जाते हैं।
2. सन सिंक्रोनस ऑर्बिट (Sun Synchronous Orbit - SSO)
- परिभाषा: यह एक विशेष ध्रुवीय कक्षा (Polar Orbit) है, जिसमें उपग्रह पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाते समय सूर्य के साथ एक निश्चित कोण बनाए रखता है। यह पृथ्वी के अवलोकन और छायाचित्रण के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है।
3. नियामक ढांचा - IN-SPACe
- IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorization Centre): इसकी स्थापना वर्ष 2020 में की गई।
- कार्य: यह अंतरिक्ष विभाग (DoS) के तहत एक एकल खिड़की नोडल एजेंसी है, जो गैर-सरकारी निजी संस्थाओं (NGPEs) को अंतरिक्ष गतिविधियों की अनुमति देती है।
- NSIL (NewSpace India Limited): इसरो (ISRO) की व्यावसायिक शाखा है, जो निजी भागीदारी और तकनीक हस्तांतरण का समन्वय करती है।
परीक्षा दृष्टिकोण (Exam POV)
याद रखने योग्य महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)
- पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट → विक्रम-1 (Mission Agaman)
- पहला निजी सब-ऑर्बिटल रॉकेट → विक्रम-S (Mission Prarambh)
- निर्माता व विकासकर्ता → Skyroot Aerospace (हैदराबाद)
- निजी स्पेस सेक्टर का नियामक → IN-SPACe (स्थापना: 2020)
- संस्थापक (Skyroot) → पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका (पूर्व ISRO वैज्ञानिक)
- प्रथम निजी स्पेसटेक यूनिकॉर्न → स्काईरूट एयरोस्पेस (2026)
- रोडमैप → विक्रम-2 का प्रक्षेपण वर्ष 2027 में प्रस्तावित है।
महत्वपूर्ण फुल फॉर्म (Full Forms)
- ISRO: Indian Space Research Organisation
- LEO: Low Earth Orbit
- :
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
1भारत का पहला निजी ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल कौन-सा है?
2विक्रम-1 का निर्माण किस कंपनी ने किया है?
3IN-SPACe की स्थापना किस वर्ष की गई थी?
4विक्रम-1 रॉकेट के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है/हैं?
5भारत का पहला निजी सब-ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-एस' (Vikram-S) किस मिशन के तहत लॉन्च किया गया था?
6स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापकों में शामिल पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका पूर्व में किस संस्थान के वैज्ञानिक थे?
7लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) पृथ्वी की सतह से लगभग कितनी ऊँचाई तक स्थित कक्षा को माना जाता है?
8स्काईरूट एयरोस्पेस भारत की पहली निजी स्पेसटेक यूनिकॉर्न किस वर्ष में बनी?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेख के स्रोत
3 स्रोत
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