मध्य प्रदेश का इतिहास, भूगोल, राजव्यवस्था, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और विविध तथ्य।
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मध्य प्रदेश के जबलपुर के दो प्रसिद्ध कृषि उत्पादों—जबलपुरी मटर (Jabalpuri Matar) और जबलपुर सिंघाड़ा (Jabalpur Singhada) को भारत सरकार द्वारा भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication - GI) टैग प्रदान किया गया है। यह देश में पहली बार है जब मटर और सिंघाड़े को जीआई मान्यता मिली है।

बनारसी साड़ी, दार्जिलिंग चाय और चंदेरी साड़ी जैसे पारंपरिक उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) दिलाकर कानूनी सुरक्षा प्रदान करने में पद्मश्री डॉ. रजनीकांत का असाधारण योगदान रहा है। उन्हें भारत में 'GI Man of India' के रूप में सम्मानित किया जाता है।

मध्य प्रदेश की चार पारंपरिक आदिवासी फसलों—सीताही कुटकी, नागदमन कुटकी, बैगानी अरहर और महाकोशल छत्रिया चावल—को भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त हुआ है। यह उनकी विशिष्ट गुणवत्ता और पारंपरिक खेती को संरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
