Key Highlights
1. वैश्विक वन लक्ष्य रिपोर्ट 2026: चर्चा में क्यों?

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी ग्लोबल फॉरेस्ट गोल्स रिपोर्ट 2026 (Global Forest Goals Report 2026) ने विश्व को वनों की बिगड़ती स्थिति के प्रति आगाह किया है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 से 2025 के बीच वैश्विक वन क्षेत्र में लगभग 4 करोड़ हेक्टेयर (40 मिलियन हेक्टेयर) की कमी दर्ज की गई है। रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि कृषि विस्तार के अतिरिक्त अब ईंधन लकड़ी (Fuelwood) और चारकोल की बढ़ती मांग भी वन क्षरण का प्रमुख कारण बनती जा रही है, विशेषकर अफ्रीका और एशिया के विकासशील क्षेत्रों में।
यह निष्कर्ष ऐसे समय में सामने आया है जब विश्व जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति के लिए वनों को सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों में से एक मान रहा है। भारत सहित विश्व के अधिकांश देशों के लिए यह रिपोर्ट केवल पर्यावरणीय चिंता नहीं बल्कि विकास, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़ा एक व्यापक नीति दस्तावेज है।
2. ग्लोबल फॉरेस्ट गोल्स रिपोर्ट 2026 का परिचय व ढाँचा
यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के विभाग (UNDESA) तथा संयुक्त राष्ट्र वन मंच (United Nations Forum on Forests-UNFF) द्वारा तैयार की जाती है। इसका उद्देश्य वर्ष 2017-2030 के लिए निर्धारित संयुक्त राष्ट्र रणनीतिक वन योजना (UN Strategic Plan for Forests) के अंतर्गत निर्धारित छह वैश्विक वन लक्ष्यों (6 Global Forest Goals) और 26 उप-लक्ष्यों (26 Targets) की प्रगति का आकलन करना है।
इन लक्ष्यों का उद्देश्य विश्वभर में वन क्षेत्र का संरक्षण, पुनर्स्थापन, सतत प्रबंधन तथा वनों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन और गरीबी जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान करना है।
3. ग्लोबल फॉरेस्ट गोल्स रिपोर्ट 2026 के मुख्य निष्कर्ष एवं आंकड़े
| मापदंड / सूचकांक | प्रामाणिक आंकड़ा एवं स्थिति (2015-2025) |
|---|---|
| वैश्विक वन क्षेत्र (2015) | 4.18 अरब हेक्टेयर |
| वैश्विक वन क्षेत्र (2025) | 4.14 अरब हेक्टेयर |
| 10 वर्षों में शुद्ध वन कमी | लगभग 4 करोड़ हेक्टेयर (40 मिलियन हेक्टेयर) |
| प्राथमिक वनों (Primary Forests) का नुकसान | 1.6 करोड़ हेक्टेयर (सर्वाधिक दक्षिण अमेरिका में) |
| वनों की कटाई का मुख्य कारण | कृषि विस्तार एवं ईंधन लकड़ी/चारकोल मांग |
- वैश्विक वन क्षेत्र में लगातार गिरावट: वर्ष 2015 में विश्व का कुल वन क्षेत्र 4.18 अरब हेक्टेयर था, जो 2025 में घटकर 4.14 अरब हेक्टेयर रह गया। अर्थात एक दशक में लगभग 4 करोड़ हेक्टेयर वन क्षेत्र समाप्त हो गया। यह गिरावट वैश्विक स्तर पर वन संरक्षण प्रयासों की सीमाओं को दर्शाती है।
- प्राथमिक वनों का तेजी से क्षरण: विश्व ने 2015-2025 के बीच लगभग 1.6 करोड़ हेक्टेयर प्राथमिक वन खो दिए। प्राथमिक वन वे प्राकृतिक वन होते हैं जिनमें मानवीय हस्तक्षेप अत्यंत सीमित होता है। ये वन जैव विविधता, जल संरक्षण तथा कार्बन भंडारण के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। दक्षिण अमेरिका में इन वनों का सर्वाधिक नुकसान हुआ है।
- कृषि विस्तार अभी भी सबसे बड़ा कारण: वनों को कृषि भूमि में परिवर्तित करना वैश्विक स्तर पर वनों की कटाई का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। खाद्य उत्पादन की बढ़ती मांग तथा व्यावसायिक कृषि गतिविधियों ने बड़े पैमाने पर वन क्षेत्रों को प्रभावित किया है।
- ईंधन लकड़ी और चारकोल की बढ़ती मांग: रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि ऊर्जा गरीबी के कारण विकासशील देशों में लाखों परिवार आज भी ईंधन लकड़ी और चारकोल पर निर्भर हैं। परिणामस्वरूप वन संसाधनों पर भारी दबाव बढ़ रहा है। यह स्थिति विशेष रूप से उप-सहारा अफ्रीका तथा एशिया के कुछ क्षेत्रों में अधिक गंभीर है।
- जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव: सूखा, हीटवेव, जंगलों में आग, कीट संक्रमण तथा वन रोगों की बढ़ती घटनाएं वन पारिस्थितिक तंत्र को कमजोर कर रही हैं। इससे वन कार्बन सिंक के रूप में अपनी क्षमता खो रहे हैं।
- वन बहाली की धीमी प्रगति: 91 देशों ने लगभग 19 करोड़ हेक्टेयर वन क्षेत्र के पुनर्स्थापन का संकल्प लिया था, किंतु 2025 तक केवल 4.4 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र ही बहाल किया जा सका। यह दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर वन बहाली की गति अभी भी अपेक्षित स्तर से काफी कम है।
4. ऊर्जा गरीबी और वन संकट: नया दृष्टिकोण

ग्लोबल फॉरेस्ट गोल्स रिपोर्ट 2026 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह वन क्षरण को केवल पर्यावरणीय समस्या के रूप में नहीं देखती, बल्कि इसे ऊर्जा और गरीबी के प्रश्न से जोड़ती है। दुनिया के अनेक गरीब समुदाय आज भी खाना पकाने और घरेलू ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए लकड़ी पर निर्भर हैं। ऐसी स्थिति में वन संरक्षण संबंधी कानून तब तक पूर्णतः प्रभावी नहीं हो सकते जब तक लोगों को वैकल्पिक स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध नहीं कराई जाती।
इसलिए स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच, एलपीजी, बायोगैस, सौर ऊर्जा और स्वच्छ खाना पकाने की तकनीकों का प्रसार वास्तव में वन संरक्षण का भी एक महत्वपूर्ण उपाय है। यह दृष्टिकोण सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के एकीकृत स्वरूप को दर्शाता है।
5. संयुक्त राष्ट्र सतत विकास रिपोर्ट 2026: भारत 94वें स्थान पर (SDG Rank 94th)

संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क (UN SDSN) द्वारा जारी सतत विकास रिपोर्ट 2026 (Sustainable Development Report 2026) के अनुसार, भारत ने 167 देशों में 94वाँ स्थान प्राप्त किया है। देश का समग्र स्कोर 100 में से 68.3 रहा, जो अब तक का उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जाता है और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में हुई महत्त्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है।
| मापदंड / सूचकांक | वैश्विक एवं भारत का प्रामाणिक आंकड़ा (SDR 2026) |
|---|---|
| भारत की वैश्विक रैंकिंग (2026) | 94वाँ स्थान (167 देशों में) |
| भारत का समग्र स्कोर | 68.3 / 100 (2015 में 112वें स्थान से 18 स्थानों का सुधार) |
| वैश्विक शीर्ष 3 देश | 1. फिनलैंड | 2. स्वीडन | 3. डेनमार्क (नॉर्डिक देश) |
| सब्सैद्धांतिक सबसे कमजोर देश | चाड, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, दक्षिण सूडान |
| बहुपक्षवाद (Multilateralism) में प्रथम | बारबाडोस (अमेरिका सबसे अंतिम) |
- वैश्विक स्थिति चिंताजनक: वर्ष 2030 तक की दिशा में 17 सतत विकास लक्ष्यों में से कोई भी लक्ष्य अब तक पूरी तरह से निर्धारित समय-सीमा के अनुरूप प्रगति पथ पर नहीं है। केवल 16.5% SDG ही सही गति से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि 15% लक्ष्य 2015 के बाद से विपरीत दिशा में चले गए हैं।
- शीर्ष एवं पिछड़े देश: नॉर्डिक देश शीर्ष पर हैं (फिनलैंड प्रथम, स्वीडन द्वितीय, डेनमार्क तृतीय)। संघर्षग्रस्त चाड, मध्य अफ्रीकी गणराज्य व दक्षिण सूडान सबसे नीचे हैं।
- भारत की उल्लेखनीय प्रगति: 2015 के 112वें स्थान से 94वें स्थान तक (18 स्थानों का सुधार)। हालांकि यह भूटान, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसियों से पीछे है।
- संरचनात्मक चुनौतियाँ (7 लक्ष्य): भारत SDG 2 (शून्य भुखमरी), SDG 3 (उत्तम स्वास्थ्य), SDG 5 (लैंगिक समानता), SDG 11 (संवहनीय शहर), SDG 14 (जलीय जीव), SDG 15 (स्थलीय जीव) और SDG 16 (शांति व न्याय) में प्रमुख चुनौतियों का सामना कर रहा है। SDG 16 के तहत प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक स्कोर 2015 के 59.51 से घटकर 2026 में 31.96 रह गया है। प्रति व्यक्ति CO₂ उत्सर्जन 2.21 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा है।
6. भारत की प्रमुख वन संरक्षण एवं सतत विकास पहलें

- हरित भारत मिशन (Green India Mission): वर्ष 2014 में राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) के अंतर्गत शुरू किया गया। उद्देश्य: वन व वृक्ष आच्छादन बढ़ाना।
- राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम (National Afforestation Programme): वर्ष 2000 में प्रारंभ। क्षतिग्रस्त वन क्षेत्रों का पुनरुद्धार व संयुक्त वन प्रबंधन समितियों द्वारा सामुदायिक भागीदारी।
- CAMPA निधि (CAF Act 2016): 2002 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद अवधारणा विकसित हुई तथा प्रतिपूरक वनीकरण निधि अधिनियम, 2016 द्वारा वैधानिक आधार मिला।
- वन संरक्षण अधिनियम (Forest Conservation Act 1980): 1980 में लागू, वन भूमि के गैर-वन उपयोग पर नियंत्रण। वर्ष 2023 में महत्वपूर्ण संशोधन।
- भूमि क्षरण तटस्थता (LDN) लक्ष्य 2030: UNCCD के तहत 2019 में घोषित, 2030 तक भूमि क्षरण तटस्थता का लक्ष्य।
- मिशन LiFE (Lifestyle for Environment): COP-26 (ग्लासगो 2021) में अवधारणा व 2022 में औपचारिक लॉन्च। पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली।
7. भारत का घरेलू SDG निगरानी ढाँचा: नीति आयोग व MoSPI
- नीति आयोग (SDG India Index): भारत में SDG निगरानी हेतु नोडल एजेंसी। सहकारी एवं प्रतिस्पर्द्धी संघवाद को बढ़ावा।
- MoSPI (राष्ट्रीय संकेतक ढाँचा - NIF): 277 राष्ट्रीय संकेतकों द्वारा SDG प्रगति की निगरानी।
- पंचायती राज मंत्रालय (LIF & PAI): 9 विषयगत थीम व पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) द्वारा 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों का मूल्यांकन।
8. आगे की राह एवं निष्कर्ष
- वनों की कटाई रोकने हेतु कठोर नीतियाँ व कृषि-वन प्रबंधन में संतुलन।
- स्वच्छ ऊर्जा (LPG, बायोगैस, सौर) तक सार्वभौमिक पहुँच द्वारा ऊर्जा गरीबी का अंत।
- जनजातीय एवं स्थानीय समुदायों की भागीदारी व डिफॉरेस्टेशन-फ्री सप्लाई चेन।
निष्कर्षतः, ग्लोबल फॉरेस्ट गोल्स रिपोर्ट 2026 और सतत विकास रिपोर्ट 2026 यह सिद्ध करती हैं कि वन संरक्षण और सतत विकास केवल पर्यावरणीय प्रश्न नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के भविष्य से जुड़े मूलभूत विषय हैं। विकास और पर्यावरण के मध्य संतुलन ही 2030 एजेंडा की सफलता की कुंजी है।
9. संबंधित अध्ययन सामग्री एवं नोट्स
👉 आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम 2025: NCMC, UDMA धारा 41A व MPPSC Notes
👉 डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन: हरित क्रांति, 50% MSP स्वामीनाथन आयोग रिपोर्ट व योगदान
👉 भारत की जनसंख्या नीति (NPP-2000), जनगणना 2011 आंकड़े व कानून
👉 अंतर्राष्ट्रीय संगठन एवं उनके मुख्यालय: संपूर्ण सूची व रिपोर्ट्स
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
1ग्लोबल फॉरेस्ट गोल्स रिपोर्ट 2026 निम्नलिखित में से किस संस्था द्वारा जारी की गई है?
2ग्लोबल फॉरेस्ट गोल्स रिपोर्ट 2026 के अनुसार, वर्ष 2015 से 2025 के बीच वैश्विक वन क्षेत्र में कितनी कमी दर्ज की गई?
3संयुक्त राष्ट्र सतत विकास रिपोर्ट 2026 (UN SDSN) में भारत ने 167 देशों में कौन सा स्थान प्राप्त किया है?
4सतत विकास रिपोर्ट 2026 (SDG Index 2026) की वैश्विक रैंकिंग में प्रथम स्थान पर कौन सा देश रहा?
5भारत में प्रतिपूरक वनीकरण निधि अधिनियम (CAMPA Act) किस वर्ष वैधानिक रूप से पारित किया गया था?
6राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) के तहत 'हरित भारत मिशन' किस वर्ष शुरू किया गया था?
7पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली को बढ़ावा देने वाले 'मिशन LiFE' की अवधारणा PM मोदी ने किस सम्मेलन में दी थी?
8भारत में सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के कार्यान्वयन एवं निगरानी हेतु नोडल एजेंसी कौन सी है?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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