
भारत में 'हरित क्रांति के जनक' (Father of the Green Revolution in India) कहे जाने वाले महान कृषि वैज्ञानिक एवं आनुवंशिकीविद् मॉन्कोम्बू संबासिवन (एम. एस.) स्वामीनाथन (Mankombu Sambasivan Swaminathan) का 98 वर्ष की आयु में 28 सितंबर, 2023 को चेन्नई में निधन हो गया। वर्ष 2024 में भारत सरकार द्वारा उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' (Bharat Ratna 2024) से सम्मानित किया गया।

| वर्ष / समय-सीमा | पद / संस्था | प्रमुख योगदान व भूमिका |
|---|---|---|
| 1954 | भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) | संस्थान में वैज्ञानिक के रूप में कार्य प्रारंभ किया तथा फसल प्रजननो पर शोध किया। |
| 1972–1979 | भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) | ICAR के महानिदेशक (Director General) के रूप में भारत में कृषि अनुसंधान व शिक्षा का विस्तार किया। |
| 1980–1982 | योजना आयोग (Planning Commission) | योजना आयोग के सदस्य के रूप में कृषि एवं ग्रामीण विकास नीतियों का निर्माण किया। |
| 1982–1988 | अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) | फिलीपींस स्थित IRRI के पहले भारतीय महानिदेशक बने; एशिया में उच्च उपज वाले चावल का प्रसार किया। |
1960 के दशक में भारत भीषण खाद्यान्न संकट और अकाल की स्थिति से जूझ रहा था तथा अमेरिका से PL-480 योजना के तहत खाद्यान्न आयात पर निर्भर था। डॉ. स्वामीनाथन ने अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ. नॉर्मन बोरलॉग (Norman Borlaug) के साथ मिलकर मेक्सिकन अर्ध-वामन (Semi-Dwarf) गेहूँ की किस्मों को भारतीय जलवायु के अनुकूल विकसित किया।
वर्ष 2004 में केंद्र सरकार ने डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय किसान आयोग (National Commission on Farmers
बहुत कम लोग जानते हैं कि डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन ने केवल कृषि ही नहीं, बल्कि भारत की जनसंख्या नीति के निर्माण में भी युगांतरकारी योगदान दिया। उन्होंने वर्ष 1994 में गठित जनसंख्या नीति विशेषज्ञ समूह की अध्यक्षता की, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर फरवरी 2000 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000 (NPP-2000) लागू की।
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डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन का जीवन और कार्य केवल कृषि तक सीमित नहीं था; उन्होंने खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और जनसंख्या नीति के क्षेत्र में भारत को नई दिशा दी। MPPSC एवं UPSC परीक्षा की दृष्टि से हरित क्रांति, 50% MSP सिफारिश, सदाबहार क्रांति व NPP-2000 में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
1भारत में हरित क्रांति के जनक डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन को किस वर्ष भारत रत्न से सम्मानित किया गया?
21987 में प्रथम विश्व खाद्य पुरस्कार (World Food Prize) के विजेता कौन थे?
3स्वामीनाथन आयोग (राष्ट्रीय किसान आयोग) के अनुसार MSP उत्पादक लागत से कितना अधिक होना चाहिए?
4डॉ. स्वामीनाथन द्वारा मेक्सिकन अर्ध-वामन किस्मों से भारत हेतु विकसित गेहूँ की प्रमुख किस्में कौन सी थीं?
5पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना निरंतर कृषि उत्पादकता बढ़ाने हेतु 'सदाबहार क्रांति' की अवधारणा किसने दी?
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भारत में हरित क्रांति के जनक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन का जीवन परिचय, कल्याण सोना व सोनालिका गेहूँ किस्मों का विकास, स्वामीनाथन आयोग 50% MSP सिफारिश, सदाबहार क्रांति (Evergreen Revolution), राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 (NPP-2000) में भूमिका, भारत रत्न 2024, विश्व खाद्य पुरस्कार व मैंग्रोव संरक्षण। MPPSC व UPSC परीक्षा नोट्स।

| 1988 | MSSRF की स्थापना | सतत कृषि व ग्रामीण विकास हेतु चेन्नई में 'एम. एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन' की स्थापना की। |
| 1994–2000 | राष्ट्रीय जनसंख्या नीति विशेषज्ञ समूह | भारत की राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000 (NPP-2000) का मसौदा तैयार करने वाली समिति की अध्यक्षता की। |
| 2004–2006 | राष्ट्रीय किसान आयोग (NCF) | राष्ट्रीय किसान आयोग की अध्यक्षता की तथा ऐतिहासिक 50% MSP सिफारिश प्रस्तुत की। |