संसद द्वारा हाल ही में 20 वर्ष पुराने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 में दूरगामी संशोधन करने हेतु आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम, 2025 पारित किया गया है। जलवायु परिवर्तन के कारण शहरी बाढ़, बादल फटने और भीषण प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति को देखते हुए भारत के आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को आधुनिक बनाने के लिए यह संशोधन लाया गया है।
| क्षेत्र / विषय | 2005 का मूल अधिनियम | 2025 संशोधन अधिनियम का नया प्रावधान |
|---|---|---|
| NCMC का दर्जा | प्रशासनिक निकाय (कार्यकारी आदेश से) | वैधानिक दर्जा (Statutory Status) प्राप्त |
| शहरी आपदा प्रबंधन | कोई पृथक संस्थागत ढाँचा नहीं | UDMA (धारा 41A): राज्य की राजधानी व नगर निगमों में शहरी आपदा प्राधिकरण |
| आपदा डेटाबेस | कोई एकीकृत केंद्रीय डेटाबेस नहीं | राष्ट्रीय आपदा डेटाबेस (National Disaster Database) की स्थापना |
| HLC समिति | गृह मंत्री की अध्यक्षता में प्रशासनिक समिति | उच्च स्तरीय समिति (HLC) को वैधानिक मान्यता |
| SDRF सुदृढ़ीकरण | सीमित वित्तीय लचीलापन | राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल हेतु वित्तीय एवं परिचालन शक्तियों का विस्तार |
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आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम 2025 भारत के आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढाँचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। MPPSC Mains GS Paper 3 एवं UPSC अभ्यर्थियों के लिए धारा 41A, UDMA व NCMC के वैधानिक दर्जे का विश्लेषण अति महत्वपूर्ण है।
1आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम 2025 के तहत किस धारा के अंतर्गत शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UDMA) के गठन का प्रावधान है?
2राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (NCMC) के अध्यक्ष कौन होते हैं?
3 स्रोत
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आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम 2025 के मुख्य प्रावधान: NCMC व HLC को वैधानिक दर्जा, शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UDMA - धारा 41A), राष्ट्रीय आपदा डेटाबेस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) का सुदृढ़ीकरण। MPPSC & UPSC परीक्षा नोट्स।
