प्रसंग (Context)
1 जुलाई 2026 से देश भर में नया ग्रामीण रोजगार कानून 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) कानून, 2025' (VB-G RAM G) लागू हो गया है। इस ऐतिहासिक कानून का राष्ट्रीय शुभारंभ 2 जुलाई 2026 को आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के मुक्कावरिपल्ली गांव में किया जाएगा, जहां ग्रामीणों को नए रोजगार गारंटी कार्ड बांटे जाएंगे।

पृष्ठभूमि: मनरेगा का स्थान लिया
इस नए कानून ने वर्ष 2005 के 'महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम' (मनरेगा) का स्थान लिया है। यह बदलाव ग्रामीण विकास नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ को प्रदर्शित करता है, जो मुख्य रूप से नीचे से ऊपर की 'मांग-आधारित प्रणाली' से बदलकर केंद्र द्वारा निर्देशित 'आपूर्ति-आधारित योजना' की ओर केंद्रित है।
मुख्य प्रावधान और विशेषताएं
- रोजगार की अवधि में वृद्धि: ग्रामीण वयस्क सदस्यों के लिए वैधानिक रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन प्रति वित्तीय वर्ष किया गया है।
- दिहाड़ी में बढ़ोतरी: देशभर में औसत दिहाड़ी ₹298.8 से बढ़ाकर ₹327.4 प्रतिदिन की गई है, जिससे प्रति व्यक्ति दैनिक औसत ₹28.6 का लाभ होगा।
- बजटीय सहायता: समय पर मजदूरी भुगतान के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को ₹95,692.31 करोड़ जारी किए हैं।
- वित्तीय हिस्सेदारी अनुपात: सामान्य राज्यों में व्यय साझेदारी केंद्र:राज्य का अनुपात 60:40 होगा, जबकि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह अनुपात 90:10 निर्धारित किया गया है।
- कृषि मौसम सुरक्षा: बुवाई और कटाई जैसे व्यस्त कृषि सीजन में कृषि श्रम की उपलब्धता बनाए रखने के लिए राज्य सरकारें वर्ष में अधिकतम 60 दिन इस योजना के तहत काम को सीमित कर सकेंगी।
- योजना निर्माण का आधार: कार्यों का नियोजन 'विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं' (VGPP) के माध्यम से होगा, जिन्हें राष्ट्रीय स्थानिक नियोजन प्रणालियों के साथ एकीकृत किया जाएगा।
श्रमिकों और विश्लेषकों की चिंताएं
- वित्तीय व्यवहार्यता पर संशय: विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ा हुआ 125 दिनों का रोजगार वादा पर्याप्त बजटीय सहयोग के बिना लागू किया जा रहा है। कोई भी प्रमुख राज्य अपने सक्रिय कार्डधारकों को वादे के आधे दिन भी काम देने की स्थिति में नहीं है।
- मजदूरी दरों में अस्पष्टता: नियमों में वैधानिक न्यूनतम मजदूरी दरों की कानूनी गारंटी को लेकर स्पष्टता का अभाव है।
- बायोमेट्रिक और तकनीकी विफलता: चेहरे की पहचान और बायोमेट्रिक उपस्थिति का सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुरजोर विरोध किया है, क्योंकि इंटरनेट और सर्वर की खराब स्थिति के कारण श्रमिकों के कार्य-दिवस व मजदूरी का नुकसान हो रहा है।
- राज्यों पर बढ़ता वित्तीय बोझ: मनरेगा के तहत मजदूरी का 100% केंद्र वहन करता था, लेकिन नए कानून में सामान्य राज्यों को 40% खर्च स्वयं उठाना होगा, जिससे कई गरीब राज्यों के बजट पर दबाव पड़ेगा और क्षेत्रीय असमानता बढ़ेगी।
VB-G RAM G Act: परीक्षा उपयोगी मुख्य तथ्य
- प्रतिस्थापित कानून: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), 2005
- नया रोजगार कोटा: 125 दिन प्रति वित्तीय वर्ष (पहले 100 दिन था)
- नई राष्ट्रीय औसत दिहाड़ी: ₹327.4 प्रतिदिन (₹28.6 की बढ़ोतरी)
- वित्तीय भागीदारी अनुपात (केंद्र:राज्य): सामान्य राज्य (60:40), पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्य/UTs (90:10)
- योजना नियोजन ढांचा: विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं (VGPP) और स्थानिक नियोजन एकीकरण
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
1हाल ही में 1 जुलाई 2026 से लागू हुए 'VB-G RAM G Act' ने किस पूर्ववर्ती ग्रामीण रोजगार कानून का स्थान लिया है?
2नये VB-G RAM G कानून के तहत सामान्य राज्यों के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच वित्तीय साझेदारी का अनुपात क्या निर्धारित किया गया है?
3VB-G RAM G कानून के तहत सामान्य ग्रामीण मजदूरों के लिए प्रतिदिन की न्यूनतम मजदूरी (Daily Wage) कितनी निर्धारित की गई है?
4VB-G RAM G Act के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वर्ष में कितने दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है?
5भारत में ग्रामीण रोजगार संबंधी VB-G RAM G कानून का क्रियान्वयन किस केंद्रीय मंत्रालय द्वारा किया जाता है?
6पूर्ववर्ती मनरेगा की तुलना में नए VB-G RAM G कानून का मुख्य प्रशासनिक बदलाव क्या है?
7VB-G RAM G कानून के तहत मजदूरी (Labour) और सामग्री (Material) घटकों के बीच खर्च का क्या अनुपात निर्धारित किया गया है?
8VB-G RAM G कानून के अंतर्गत किसी मजदूर द्वारा काम की मांग करने के बाद अधिकतम कितने दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य है?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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