चर्चा में क्यों?
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs - MoHUA) द्वारा स्वच्छ भारत मिशन - शहरी 2.0 (SBM-U 2.0) के अंतर्गत 'डंपसाइट रेमेडिएशन एक्सेलेरेटर प्रोग्राम' (DRAP) की शुरुआत की गई है।
इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का प्राथमिक लक्ष्य 'लक्ष्य: ज़ीरो डंपसाइट' (Lakshya: Zero Dumpsites) के तहत सितंबर 2026 तक देश भर के शहरों में दशकों से जमा पुराने कचरे के पहाड़ों (Legacy Waste Dumpsites) का 100% वैज्ञानिक निस्तारण करना है।
DRAP की मुख्य विशेषताएं एवं लक्ष्य आंकड़े
- 214 उच्च-प्रभाव डंपसाइट का चयन: DRAP के तहत 202 शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) में स्थित 214 उच्च-प्रभाव डंपसाइट्स (High-Impact Dumpsites) को प्राथमिकता दी गई है।
- 8.6 से 8.8 करोड़ मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण: ये 214 डंपसाइट भारत के कुल लेगेसी वेस्ट के लगभग 80% भाग (8.6 से 8.8 करोड़ मीट्रिक टन) का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- ₹550 प्रति टन वित्तीय सहायता: केंद्र सरकार द्वारा लेगेसी वेस्ट के वैज्ञानिक रेमेडिएशन के लिए स्थानीय निकायों को ₹550 प्रति मीट्रिक टन की वित्तीय सहायता दी जा रही है।
- बायोमाइनिंग (Biomining) प्रक्रिया: ट्रॉमल स्क्रीन द्वारा कचरे की छंटाई करके रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (RDF) को सीमेंट भट्टियों में ईंधन के रूप में, कार्बनिक मृदा संशोधक (Fine Soil) को खेतों में और इनर्ट वेस्ट को निर्माण कार्यों में उपयोग करना।
मध्य प्रदेश का इंदौर मॉडल एवं मियावाकी वनीकरण
- इंदौर नगर निगम की ऐतिहासिक सफलता: मध्य प्रदेश के इंदौर ने देवगुराड़िया स्थित 100 एकड़ के डंपसाइट पर जमा 13 लाख मीट्रिक टन लेगेसी वेस्ट का 100% बायोमाइनिंग करके 100 एकड़ मूल्यवान शहरी भूमि को पूरी तरह से कचरा मुक्त और हरा-भरा बनाया।
- मियावाकी तकनीक (Miyawaki Method): डंपसाइट से खाली कराई गई भूमि पर सघन जापानी वनीकरण तकनीक 'मियावाकी' द्वारा 'सिटी फॉरेस्ट' और जैव-विविधता पार्क विकसित किए जा रहे हैं।
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 (SWM Rules 2016): भारत में ठोस कचरे के गीले-सूखे पृथक्करण, कंपोस्टिंग और रिसाइक्लिंग के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करते हैं।
MPPSC एवं UPSC परीक्षा जुड़ाव
- MPPSC मुख्य परीक्षा: पेपर 3 (इकाई 9) - 'पर्यावरण एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन: बायोमाइनिंग, कचरा निस्तारण व स्वच्छ भारत मिशन' तथा पेपर 2 - 'नगरीय निकाय'।
- UPSC मुख्य परीक्षा: GS Paper 3 - 'पर्यावरण प्रदूषण, अपशिष्ट प्रबंधन, सर्कुलर इकोनॉमी व सतत शहरी विकास'।
- प्रारंभिक परीक्षा तथ्य: SBM-U 2.0, DRAP का लक्ष्य वर्ष (सितंबर 2026), ₹550/टन प्रोत्साहन, और इंदौर देवगुराड़िया बायोमाइनिंग मॉडल।
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- वैश्विक जल सुरक्षा: संयुक्त राष्ट्र विश्व जल विकास रिपोर्ट 2026 - यूनेस्को
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- इंदौर मॉडल व MPPSC: MPPSC मुख्य परीक्षा पेपर-3 इकाई-9 पर्यावरण व ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
1डंपसाइट रेमेडिएशन एक्सेलेरेटर प्रोग्राम (DRAP) किस केंद्रीय मंत्रालय की पहल है?
2मध्य प्रदेश का कौन सा शहर अपने 100 एकड़ के देवगुराड़िया डंपसाइट का 100% बायोमाइनिंग करके देश का रोल मॉडल बना?
3पुराने कचरे की बायोमाइनिंग छंटाई के दौरान प्राप्त 'RDF' का क्या अर्थ है?
4स्वच्छ भारत मिशन - शहरी 2.0 (SBM-U 2.0) का मुख्य विजन क्या है?
5भारत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम (Solid Waste Management Rules) किस वर्ष अधिसूचित किए गए थे?
6शहरी अपशिष्ट प्रबंधन में 'सर्कुलर इकोनॉमी' (Circular Economy) का मुख्य सिद्धांत क्या है?
7MPPSC मुख्य परीक्षा पेपर-3 इकाई-9 के अनुसार जैव-चिकित्सा अपशिष्ट (Bio-Medical Waste) के निपटान की मानक विधि क्या है?
8कचरे के पहाड़ों को हटाकर शहरी वनीकरण के लिए अपनाई जाने वाली प्रसिद्ध जापानी तकनीक का नाम क्या है?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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