Key Highlights
1. डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन: परिचय एवं जीवन यात्रा

भारत में 'हरित क्रांति के जनक' (Father of the Green Revolution in India) कहे जाने वाले महान कृषि वैज्ञानिक एवं आनुवंशिकीविद् मॉन्कोम्बू संबासिवन (एम. एस.) स्वामीनाथन (Mankombu Sambasivan Swaminathan) का 98 वर्ष की आयु में 28 सितंबर, 2023 को चेन्नई में निधन हो गया। वर्ष 2024 में भारत सरकार द्वारा उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' (Bharat Ratna 2024) से सम्मानित किया गया।
- जन्म एवं प्रारंभिक प्रेरणा: डॉ. स्वामीनाथन का जन्म 7 अगस्त, 1925 को कुंभकोणम (तमिलनाडु) में हुआ था। वे महात्मा गांधी के विचारों तथा स्वतंत्रता संग्राम से अत्यधिक प्रभावित थे। शुरुआत में वे चिकित्सा (Medicine) के क्षेत्र में जाना चाहते थे, परंतु 1942–1943 के भयानक बंगाल अकाल (Bengal Famine) के भीषण दृश्य ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और उन्होंने भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने हेतु कृषि विज्ञान को अपना लक्ष्य बनाया।
- उच्च शिक्षा एवं शोध: उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से प्राणिशास्त्र में B.Sc., कोयंबटूर कृषि कॉलेज से कृषि विज्ञान में B.Sc. तथा वर्ष 1952 में प्रतिष्ठित कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (UK) से आनुवंशिकी (Genetics) में Ph.D. की उपाधि प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय (USA) में पोस्ट-डॉक्टरेट शोध किया।
2. प्रमुख पद एवं प्रशासनिक कैरियर

| वर्ष / समय-सीमा | पद / संस्था | प्रमुख योगदान व भूमिका |
|---|---|---|
| 1954 | भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) | संस्थान में वैज्ञानिक के रूप में कार्य प्रारंभ किया तथा फसल प्रजननो पर शोध किया। |
| 1972–1979 | भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) | ICAR के महानिदेशक (Director General) के रूप में भारत में कृषि अनुसंधान व शिक्षा का विस्तार किया। |
| 1980–1982 | योजना आयोग (Planning Commission) | योजना आयोग के सदस्य के रूप में कृषि एवं ग्रामीण विकास नीतियों का निर्माण किया। |
| 1982–1988 | अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) | फिलीपींस स्थित IRRI के पहले भारतीय महानिदेशक बने; एशिया में उच्च उपज वाले चावल का प्रसार किया। |
3. भारत में हरित क्रांति में ऐतिहासिक भूमिका: कल्याण सोना व सोनालिका गेहूँ
1960 के दशक में भारत भीषण खाद्यान्न संकट और अकाल की स्थिति से जूझ रहा था तथा अमेरिका से PL-480 योजना के तहत खाद्यान्न आयात पर निर्भर था। डॉ. स्वामीनाथन ने अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ. नॉर्मन बोरलॉग (Norman Borlaug) के साथ मिलकर मेक्सिकन अर्ध-वामन (Semi-Dwarf) गेहूँ की किस्मों को भारतीय जलवायु के अनुकूल विकसित किया।
- कल्याण सोना एवं सोनालिका (Kalyan Sona & Sonalika): मेक्सिकन गेहूँ की किस्में लाल रंग की थीं, लेकिन भारतीय चपाती/रोटी हेतु सुनहरे गेहूँ की माँग थी। डॉ. स्वामीनाथन ने क्रॉस-ब्रीडिंग के माध्यम से सुनहरे रंग की उच्च उपज वाली किस्में — कल्याण सोना और सोनालिका विकसित कीं।
- पंजाब व हरियाणा का अन्न भंडार बनना: इन किस्मों के प्रयोग से पंजाब, हरियाणा व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गेहूँ के उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। मात्र 4 वर्षों में (1967 से 1971) भारत खाद्यान्न संकट से निकलकर आत्मनिर्भर एवं अनाज सरप्लस देश बन गया।
- 'किसान पहले' (Farmer First) दर्शन: डॉ. स्वामीनाथन का मानना था कि "खेत भी एक प्रयोगशाला है और किसान असली वैज्ञानिक हैं।" उन्होंने वैज्ञानिकों को प्रयोगशालाओं से निकलकर सीधे किसानों के खेतों में जाकर समाधान देने पर बल दिया।
4. स्वामीनाथन आयोग (NCF) एवं 50% न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सिफारिश
वर्ष 2004 में केंद्र सरकार ने डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय किसान आयोग (National Commission on Farmers - NCF) का गठन किया। इस आयोग ने 2004 से 2006 के मध्य कुल 5 ऐतिहासिक रिपोर्टें सौंपीं।
- 50% अधिक MSP की ऐतिहासिक सिफारिश (C2 + 50%): स्वामीनाथन आयोग की सबसे प्रमुख सिफारिश यह थी कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) फसल की व्यापक औसत उत्पादन लागत (C2 cost) से कम से कम 50% अधिक होना चाहिए। यह सिफारिश आज भी देश भर के किसान संगठनों की प्राथमिक मांग है।
- पौध किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2001: उन्होंने PPV&FR Act, 2001 के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाई, जिससे किसानों को पारंपरिक बीजों के संरक्षण व व्यापार के अधिकार मिले।
5. राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 (NPP-2000) में योगदान
बहुत कम लोग जानते हैं कि डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन ने केवल कृषि ही नहीं, बल्कि भारत की जनसंख्या नीति के निर्माण में भी युगांतरकारी योगदान दिया। उन्होंने वर्ष 1994 में गठित जनसंख्या नीति विशेषज्ञ समूह की अध्यक्षता की, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर फरवरी 2000 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000 (NPP-2000) लागू की।
👉 भारत की जनसंख्या नीति (NPP-2000), जनगणना 2011 आंकड़े व स्वामीनाथन समिति के संपूर्ण नोट्स पढ़ें
6. 'सदाबहार क्रांति' (Evergreen Revolution) एवं मैंग्रोव संरक्षण
- सदाबहार क्रांति (Evergreen Revolution): 1990 के दशक में हरित क्रांति के दुष्परिणामों (भूजल स्तर में गिरावट, मृदा क्षरण, कीटनाशक प्रदूषण) को देखते हुए उन्होंने 'सदाबहार क्रांति' की अवधारणा दी। इसका अर्थ है — ऐसी कृषि क्रांति जो पर्यावरण व पारिस्थिकी को नुकसान पहुँचाए बिना निरंतर उत्पादकता बढ़ाए।
- मैंग्रोव संरक्षण (Mangrove Conservation): 1989 में उन्होंने जलवायु परिवर्तन व सुनामी से रक्षा हेतु मैंग्रोव वनों की भूमिका को रेखांकित किया और 1990 में 'इन्टरनेशनल सोसाइटी फॉर मैंग्रोव इकोसिस्टम्स (ISME)' की स्थापना की। तमिलनाडु व ओडिशा में 'फिशबोन कैनाल पद्धति' द्वारा मैंग्रोव का पुनरुद्धार कराया।
- GIAHS विश्व धरोहर मान्यता: 'मन्नार की खाड़ी समुद्री जीवमंडल' तथा समुद्र तल से नीचे धान की खेती करने वाले केरल के कुट्टनाड (Kuttanad) को GIAHS (विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण कृषि विरासत स्थल) की मान्यता दिलाई।
7. प्रमुख पुरस्कार एवं सम्मान: भारत रत्न 2024 व विश्व खाद्य पुरस्कार


8. संबंधित अध्ययन सामग्री एवं नोट्स
👉 भारत की जनसंख्या नीति: NPP-2000, TFR 2.1 व स्वामीनाथन समिति के नोट्स
👉 अंतर्राष्ट्रीय संगठन एवं उनके मुख्यालय: संपूर्ण सूची व रिपोर्ट्स
👉 आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम 2025: UDMA धारा 41A व MPPSC Notes
9. निष्कर्ष
डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन का जीवन और कार्य केवल कृषि तक सीमित नहीं था; उन्होंने खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और जनसंख्या नीति के क्षेत्र में भारत को नई दिशा दी। MPPSC एवं UPSC परीक्षा की दृष्टि से हरित क्रांति, 50% MSP सिफारिश, सदाबहार क्रांति व NPP-2000 में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
1भारत में हरित क्रांति के जनक डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन को किस वर्ष भारत रत्न से सम्मानित किया गया?
21987 में प्रथम विश्व खाद्य पुरस्कार (World Food Prize) के विजेता कौन थे?
3स्वामीनाथन आयोग (राष्ट्रीय किसान आयोग) के अनुसार MSP उत्पादक लागत से कितना अधिक होना चाहिए?
4डॉ. स्वामीनाथन द्वारा मेक्सिकन अर्ध-वामन किस्मों से भारत हेतु विकसित गेहूँ की प्रमुख किस्में कौन सी थीं?
5पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना निरंतर कृषि उत्पादकता बढ़ाने हेतु 'सदाबहार क्रांति' की अवधारणा किसने दी?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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