Google Featured Snippet: साइमन कमीशन - त्वरित उत्तर (Quick Answer Box)
साइमन कमीशन क्या है (What is Simon Commission): साइमन कमीशन (औपचारिक नाम: भारतीय सांविधानिक आयोग / Indian Statutory Commission) 7 ब्रिटिश सांसदों का एक समूह था, जिसे ब्रिटेन की सरकार द्वारा भारत शासन अधिनियम 1919 के कामकाज और संवैधानिक प्रगति की समीक्षा हेतु गठित किया गया था।
गठन की तिथि (Formation Date): 8 नवंबर 1927 (लंदन में सर जॉन साइमन की अध्यक्षता में)।
भारत कब आया (Arrival Date in India): 3 फरवरी 1928 को साइमन कमीशन पहली बार बंबई (मुंबई) पहुँचा।
विरोध का मुख्य कारण (Reason for Boycott): इसमें एक भी भारतीय सदस्य शामिल नहीं था (All-White Commission / श्वेत आयोग)।
प्रसिद्ध नारा (Famous Slogan): 'Simon Go Back' (साइमन वापस जाओ)।
प्रमुख ऐतिहासिक घटना: 30 अक्टूबर 1928 को लाहौर में विरोध प्रदर्शन पर पुलिस लाठीचार्ज में घायल होने के बाद 17 नवंबर 1928 को लाला लाजपत राय (पंजाब केसरी) की शहादत हुई।
साइमन कमीशन क्या है, गठन एवं भारत कब आया?
1. गठन की पृष्ठभूमि एवं भारत में आगमन तिथि
औपचारिक नाम (Formal Name): साइमन कमीशन को औपचारिक रूप से भारतीय सांविधानिक आयोग (Indian Statutory Commission) कहा गया।
गठन का कारण: ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत शासन अधिनियम, 1919 (Government of India Act, 1919) के क्रियान्वयन की समीक्षा हेतु 8 नवंबर 1927 को लंदन में नियुक्त किया गया था। अधिनियम के अनुसार 10 वर्ष बाद आयोग बनना था, परंतु ब्रिटेन में चुनाव के भय से कंज़र्वेटिव सरकार ने इसे 2 वर्ष पूर्व ही गठित कर दिया।
अध्यक्ष एवं 7 ब्रिटिश सदस्य: आयोग के अध्यक्ष सर जॉन साइमन (Sir John Simon) थे। इसके सभी 7 सदस्य ब्रिटिश संसद के सदस्य थे, जिसमें लेबर पार्टी के नेता क्लेमेंट एटली (Clement Attlee) भी शामिल थे, जो बाद में 1947 में भारत की स्वतंत्रता के समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने।
साइमन कमीशन के 7 सदस्य (List of All 7 Members)
2. साइमन कमीशन के सातों ब्रिटिश सदस्यों के नाम
1. सर जॉन साइमन (Sir John Simon): अध्यक्ष (लिबरल पार्टी)
2. क्लेमेंट एटली (Clement Attlee): सदस्य (लेबर पार्टी - जो 1947 में स्वतंत्रता के समय ब्रिटेन के पीएम बने)
3. हैरी लेवी-लॉसन, विस्काउंट बर्नहम (Viscount Burnham): सदस्य (कंजर्वेटिव पार्टी)
4. एडवर्ड कैडोगन (Edward Cadogan): सदस्य (कंजर्वेटिव पार्टी)
साइमन कमीशन भारत क्यों आया था? (उद्देश्य एवं कार्यदेश)
3. आयोग के प्रमुख कार्य एवं समीक्षा क्षेत्र
द्वैध शासन का मूल्यांकन: आयोग का मुख्य उद्देश्य भारत सरकार अधिनियम 1919 के कामकाज का मूल्यांकन करना था, विशेष रूप से प्रांतीय द्वैध शासन की प्रणाली, जिसमें प्रांतीय जिम्मेदारियां ब्रिटिश अधिकारियों और भारतीय मंत्रियों के बीच साझा की जाती थीं।
संवैधानिक सुधारों की सिफारिश: ब्रिटिश संप्रभुता को बनाए रखते हुए शासन संबंधी चुनौतियों और भारतीय मांगों का समाधान करने हेतु सिफारिशें प्रस्तुत करना।
सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व की जांच: सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व की जांच करना तथा बढ़ते राष्ट्रवादी आंदोलनों के बीच कानून और व्यवस्था की स्थिति का आकलन करना।
उत्तरदायी शासन की सीमा: यह आंकना कि भारत में किस सीमा तक उत्तरदायी सरकार की स्थापना की जा सकती है।
साइमन कमीशन की आलोचना एवं विरोध (Madras Session 1927)
4. राष्ट्रव्यापी विरोध और कांग्रेस का मद्रास अधिवेशन (1927)
भारतीयों का जानबूझकर अपमान: एक भी भारतीय सदस्य शामिल न किए जाने के कारण इसे भारतीय राजनीतिक आकांक्षाओं का जानबूझकर किया गया अपमान माना गया।
ब्रिटिश चाल: भारतीयों का मानना था कि यह आयोग वास्तविक सुधारों में देरी करने और औपनिवेशिक नियंत्रण बनाए रखने के लिए ब्रिटिश रणनीति थी।
कांग्रेस का मद्रास अधिवेशन (1927): भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 1927 में डॉ. एम.ए. अंसारी की अध्यक्षता में मद्रास अधिवेशन में आधिकारिक तौर पर 'प्रत्येक स्तर पर और प्रत्येक रूप में' राष्ट्रव्यापी बहिष्कार का आह्वान किया।
राजनीतिक दलों की एकजुटता: बहिष्कार का समर्थन कांग्रेस, हिंदू महासभा, लिबरल फेडरेशन और मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व वाली मुस्लिम लीग ने किया।
साइमन कमीशन के समर्थक कौन थे? (Supporters of Simon Commission)
5. साइमन कमीशन का बहिष्कार न करने वाले दल एवं संगठन
प्रतियोगी परीक्षाओं (MPPSC & UPSC) में प्रायः पूछा जाता है कि किन दलों ने साइमन कमीशन का बहिष्कार नहीं किया था:
1. जस्टिस पार्टी (Justice Party - मद्रास): दक्षिण भारत की जस्टिस पार्टी ने गैर-ब्राह्मण हितों की रक्षा हेतु आयोग का समर्थन किया और इसे ज्ञापन सौंपा।
2. यूनियनवादी पार्टी (Unionist Party - पंजाब): सर फजली हुसैन और चौधरी छोटू राम के नेतृत्व वाली पंजाब की यूनियनवादी पार्टी ने बहिष्कार में भाग नहीं लिया।
3. ऑल इंडिया डिप्रेस्ड क्लासेस एसोसिएशन (Dr. B.R. Ambedkar): डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने दलितों और शोषित वर्गों के राजनीतिक अधिकारों हेतु आयोग के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए।
: मोहम्मद शफी के नेतृत्व वाले मुस्लिम लीग के गुट ने आयोग का सहयोग किया।
लाहौर विरोध प्रदर्शन एवं लाला लाजपत राय की शहादत (17 नवंबर 1928)
6. 30 अक्टूबर 1928 की घटना और लालाजी का ऐतिहासिक बयान
बंबई आगमन (3 फरवरी 1928): 3 फरवरी, 1928 को साइमन कमीशन बंबई (मुंबई) पहुँचा। इसके स्वागत में फूल नहीं, बल्कि काले झंडे और विरोध प्रदर्शन हुए।
युवाओं की भूमिका: छात्रों और युवाओं ने अग्रणी भूमिका निभाई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि भारतीय युवावर्ग अब स्वतंत्रता के संघर्ष में सक्रिय भागीदारी के लिए तैयार है।
लाहौर विरोध (30 अक्टूबर 1928): 30 अक्टूबर 1928, लाहौर में लाला लाजपत राय (पंजाब केसरी) के नेतृत्व में एक विशाल विरोध रैली आयोजित की गई।
निर्दय लाठीचार्ज: पुलिस अधीक्षक स्कॉट / सांडर्स के आदेश पर की गई लाठीचार्ज में लाला लाजपत राय के सिर पर गंभीर चोटें आईं।
साइमन कमीशन की प्रमुख सिफारिशें (Report May 1930 Recommendations)
7. साइमन कमीशन की रिपोर्ट की 5 प्रमुख सिफारिशें
साइमन कमीशन ने मई 1930 में अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसकी प्रमुख सिफारिशें निम्नलिखित थीं:
1. द्वैध शासन का अंत एवं प्रांतीय स्वायत्तता: प्रांतों में द्वैध शासन (Diarchy) को समाप्त कर प्रांतीय स्वायत्तता (Provincial Autonomy) लागू की जाए।
2. केंद्र में उत्तरदायी शासन का इनकार: केंद्र में किसी भी प्रकार का उत्तरदायी शासन स्थापित न किया जाए।
3. अखिल भारतीय संघ (All-India Federation): ब्रिटिश प्रांतों और देशी रियासतों को मिलाकर एक अखिल भारतीय संघ का विचार प्रस्तुत किया गया।
4. सांप्रदायिक निर्वाचन की निरंतरता: सांप्रदायिक निर्वाचन प्रणाली (Communal Representation) को बनाए रखा जाए।
नेहरू रिपोर्ट (1928), 1935 का अधिनियम और सविनय अवज्ञा का मार्ग
8. भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर प्रभाव
स्वशासन की माँग की तीव्रता: साइमन कमीशन के विरोध ने भारतीयों की स्वशासन की माँग को और तीव्र कर दिया।
नेहरू रिपोर्ट (1928): भारत सचिव लॉर्ड बर्कनहेड (Lord Birkenhead) की चुनौती को स्वीकार करते हुए पं. मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में सर्वदलीय समिति ने नेहरू रिपोर्ट (1928) प्रस्तुत की, जिसमें डोमिनियन स्टेटस, मूल अधिकारों और धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।
भारत शासन अधिनियम, 1935: साइमन कमीशन की सिफारिशों, गोलमेज सम्मेलनों (Round Table Conferences) और श्वेत पत्र के आधार पर ही भारत शासन अधिनियम 1935 तैयार हुआ, जिसमें प्रांतीय स्वायत्तता दी गई तथा प्रांतों से द्वैध शासन समाप्त किया गया।
पूर्ण स्वराज एवं सविनय अवज्ञा (1929-30): साइमन कमीशन के विरोध ने लाहौर अधिवेशन (1929) में तथा महात्मा गांधी के का मार्ग प्रशस्त किया।
साइमन कमीशन (भारतीय सांविधानिक आयोग) क्या है? गठन (8 नबंबर 1927), भारत आगमन (3 फरवरी 1928), 7 सदस्य, 'Simon Go Back' विरोध, समर्थकों की सूची, लाला लाजपत राय की शहादत, नेहरू रिपोर्ट 1928 एवं भारत शासन अधिनियम 1935 पर प्रभाव। MPPSC & UPSC सम्पूर्ण नोट्स।
Aakar IAS Team12 अगस्त 202610 min read1,901 बार देखा गया
श्वेत आयोग (All-White Commission): इसमें एक भी भारतीय सदस्य को शामिल न किए जाने के कारण इसे 'श्वेत आयोग' (White Commission) कहा गया। इसे भारतीयों के स्वाभिमान और आत्मनिर्णय के अधिकार का सीधा अपमान माना गया।
भारत कब आया (Arrival Date): 3 फरवरी 1928 को साइमन कमीशन बंबई (मुंबई) पहुँचा, जहाँ इसका स्वागत काले झंडों, देशव्यापी हड़ताल और 'Simon Go Back' (साइमन वापस जाओ) के नारों से हुआ।
5. वर्नोन हर्टशॉर्न (Vernon Hartshorn): सदस्य (लेबर पार्टी)
6. जॉर्ज लेन-फॉक्स (George Lane-Fox): सदस्य (कंजर्वेटिव पार्टी)
7. लॉर्ड स्ट्रैथकोना (Lord Strathcona): सदस्य (कंजर्वेटिव पार्टी)
4. मुस्लिम लीग का शफी गुट (Shafi Faction)
ऐतिहासिक कथन: 'मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत की कील साबित होगी।'* (Every blow struck on my body will be a nail in the coffin of the British Empire).
17 नवंबर 1928 को शहादत: चोटों के कारण 17 नवंबर 1928 को उनका निधन हो गया। उनकी शहादत ने पूरे देश में क्रांतिकारी चेतना को प्रज्वलित कर दिया।
5. प्रशासनिक पुनर्गठन: बर्मा (Burma) को भारत से पृथक किया जाए तथा उड़ीसा एवं सिंध को पृथक प्रांत बनाया जाए।
पूर्ण स्वराज प्रस्ताव
सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930)
बहिष्कार प्रस्ताव अधिवेशन
समर्थक दल: जस्टिस पार्टी (मद्रास), यूनियनवादी पार्टी (पंजाब), ऑल इंडिया डिप्रेस्ड क्लासेस एसोसिएशन
लाहौर प्रदर्शन तिथि: 30 अक्टूबर 1928 (नेतृत्व: लाला लाजपत राय)