चर्चा में क्यों? (Why in News?)
मध्य प्रदेश विधानसभा ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) विधेयक, 2026 पारित कर दिया है। इसके साथ ही उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद मध्य प्रदेश UCC विधेयक पारित करने वाला देश का चौथा राज्य बन गया है। यह कानून विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण, संरक्षकता एवं संपत्ति जैसे नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं एवं बच्चों के अधिकारों को सशक्त बनाना, सामाजिक समानता को बढ़ावा देना तथा संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना को लागू करना है।
मुख्य हाइलाइट्स
- मध्य प्रदेश विधानसभा: UCC विधेयक 2026 पारित किया।
- चौथा राज्य: उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद UCC बिल पारित करने वाला चौथा राज्य बना।
- तीन तलाक एवं निकाह हलाला: तीन तलाक एवं निकाह हलाला जैसी प्रथाओं को अपराध की श्रेणी में रखा गया।
- विवाह एवं तलाक: विवाह एवं तलाक का पंजीकरण अनिवार्य किया गया।
- महिलाओं एवं बच्चों के अधिकार: महिलाओं, बच्चों एवं उत्तराधिकार संबंधी कानूनों में समानता पर विशेष जोर।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विधेयक | समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026 |
| राज्य | मध्य प्रदेश |
| देश का स्थान | UCC विधेयक पारित करने वाला चौथा राज्य |
| मुख्य उद्देश्य | समान नागरिक कानून लागू करना एवं महिलाओं व बच्चों के अधिकारों को सशक्त बनाना |
| संवैधानिक आधार | अनुच्छेद 44 (DPSP) |
UCC (Uniform Civil Code) क्या है एवं इसका संवैधानिक आधार?
UCC (Uniform Civil Code) क्या है?
- परिभाषा: समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) ऐसा कानून है जिसके अंतर्गत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना, भरण-पोषण एवं संपत्ति से जुड़े नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए धर्म-आधारित अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान कानून लागू किया जाता है।
संवैधानिक आधार
अनुच्छेद 44
- राज्य के नीति निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy - DPSP) के अंतर्गत राज्य भारत के सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करेगा।
संबंधित अनुच्छेद
- अनुच्छेद 14: कानून के समक्ष समानता।
- अनुच्छेद 15: धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव निषिद्ध।
- अनुच्छेद 25: धर्म की स्वतंत्रता।

मध्य प्रदेश UCC विधेयक 2026 की प्रमुख विशेषताएँ
1. एक विवाह (Monogamy)
- बहुविवाह: बहुविवाह प्रथा को पूर्णतः समाप्त किया गया।
- वैध विवाह: एक समय में केवल एक ही वैध विवाह की अनुमति होगी।
2. तीन तलाक समाप्त
- तीन तलाक: तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्लत) को गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध घोषित किया गया।
3. निकाह हलाला पर प्रतिबंध
- निकाह हलाला: निकाह हलाला जैसी सामाजिक-धार्मिक कुप्रथाएँ अब दंडनीय अपराध होंगी।
4. विवाह पंजीकरण अनिवार्य
- Registration: प्रत्येक विवाह का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।
- व्यवस्था: ग्राम पंचायत से लेकर नगर निगम स्तर तक पंजीकरण की व्यवस्था की गई है।
5. तलाक का पंजीकरण
- तलाक: कोर्ट के माध्यम से होने वाले प्रत्येक तलाक का विधिवत पंजीकरण अनिवार्य।
6. महिलाओं को अधिक अधिकार
- संपत्ति: पैतृक एवं अर्जित संपत्ति में महिलाओं को समान अधिकार।
- विवाह: विवाह संबंधी कानूनी सुरक्षा।
- भरण-पोषण: तलाक अथवा अलग रहने की स्थिति में भरण-पोषण (Maintenance) का कानूनी अधिकार।
7. बच्चों को समान कानूनी दर्जा
- जैविक: जैविक (Biological) बच्चों की तरह समान अधिकार।
- गोद लिए हुए: गोद लिए हुए बच्चों को कानूनी समानता।
- ART: सहाय्यित प्रजननीय प्रौद्योगिकी (ART) से जन्मे बच्चे।
- सरोगेसी से जन्मे: सरोगेसी के माध्यम से जन्मे बच्चों को पूर्ण कानूनी दर्जा।
8. उत्तराधिकार में समान अधिकार
- बेटा-बेटी: बेटे और बेटी दोनों को उत्तराधिकार में समान हक।
- विवाहित-अविवाहित: विवाहित अथवा अविवाहित पुत्री के बीच कोई भेदभाव नहीं।
9. Custody का आधार
- Best Interest of Child: बच्चों की कस्टडी का फैसला बच्चे के सर्वोत्तम हित (Best Interest of Child) के आधार पर होगा।
10. Live-in Relationship
- Registration: साथ रहने (लिव-इन) के एक माह के भीतर अनिवार्य रजिस्ट्रेशन।
- दंड: बिना पंजीकरण निर्धारित अवधि से अधिक रहने पर जुर्माना एवं सजा का प्रावधान।
- गलत जानकारी: लिव-इन पंजीकरण में गलत जानकारी देने पर भी दंड का प्रावधान।
11. Live-in से जन्मे बच्चों को अधिकार
- वैध संतान: लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को वैध संतान का कानूनी दर्जा प्राप्त होगा।
- उत्तराधिकार: माता-पिता की संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार होगा।
12. हत्या करने वाले को उत्तराधिकार नहीं
- उत्तराधिकार: संपत्ति पाने के इरादे से हत्या करने वाला व्यक्ति उत्तराधिकार के अधिकार से पूर्णतः वंचित होगा।
13. अनुसूचित जनजातियों को छूट
- अनुसूचित जनजातियाँ (ST): अनुसूचित जनजातियों को UCC के दायरे से बाहर रखा गया है।
- संविधान द्वारा संरक्षित पारंपरिक समुदाय: संविधान के तहत संरक्षित पारंपरिक जनजातीय समुदायों की रूढ़िवादी प्रथाएँ अक्षुण्ण रहेंगी।
महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान
- पति द्वारा दूसरी महिला के साथ रहने पर: पत्नी को कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा।
- भरण-पोषण: भरण-पोषण (Maintenance) का मजबूत अधिकार।
- संपत्ति: संपत्ति में पूर्ण एवं समान अधिकार।
- विवाह एवं तलाक: विवाह एवं तलाक की प्रक्रिया में समान कानूनी सुरक्षा।
दंड का प्रावधान
- Live-in Registration: निर्धारित 1 माह के भीतर लिव-इन का रजिस्ट्रेशन नहीं कराना।
- गलत जानकारी: रजिस्ट्रेशन में असत्य या भ्रामक जानकारी देना।
- कानून का उल्लंघन: एक विवाह नियम या पंजीकरण नियमों का उल्लंघन करना।
- दंड स्वरूप: जुर्माना, कारावास अथवा दोनों शामिल हो सकते हैं।

अब तक UCC की स्थिति, ऐतिहासिक विकास एवं समिति
अब तक UCC की स्थिति (State-wise Status)
भारत के विभिन्न राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) की स्थिति का विवरण इस प्रकार है:
| राज्य (State) | विवरण एवं वर्तमान स्थिति |
|---|---|
| उत्तराखंड | 27 जनवरी 2025 से पूर्ण लागू (स्वतंत्र भारत में UCC लागू करने वाला पहला राज्य) |
| गुजरात | मार्च 2026 में विधानसभा द्वारा UCC विधेयक पारित |
| असम | मई 2026 में विधानसभा द्वारा UCC विधेयक पारित |
| मध्य प्रदेश | विधानसभा से UCC विधेयक 2026 पारित (देश का चौथा राज्य) |
| गोवा | पुर्तगाली सिविल कोड, 1867 के तहत स्वतंत्रता से पूर्व से समान नागरिक कानून लागू |
गोवा क्यों महत्वपूर्ण है?
- Portuguese Civil Code, 1867: गोवा में पुर्तगाली शासन के समय से ही 1867 का पुर्तगाली सिविल कोड लागू है।
- स्वतंत्रता के बाद: वर्ष 1961 में गोवा के भारत में विलय के बाद भी इस व्यवस्था को जारी रखा गया।
- महत्व: इसी कारण गोवा को लंबे समय से समान नागरिक कानून वाला राज्य माना जाता है।
UCC का ऐतिहासिक विकास (Historical Timeline)
- 1835: ब्रिटिश सरकार द्वारा आपराधिक एवं संविदा कानूनों में एकरूपता पर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, किंतु व्यक्तिगत कानूनों को बाहर रखा गया।
- 1840: आपराधिक एवं अनुबंध संबंधी कानूनों का एकीकरण।
- 1941: बी. एन. राव समिति (B.N. Rau Committee) का गठन हिंदू कानूनों को संहित करने के लिए किया गया।
- 1948: संविधान सभा में हिंदू कोड बिल पर चर्चा शुरू।
- 1950: संविधान के अनुच्छेद 44 (DPSP) में UCC का प्रावधान शामिल।
मध्य प्रदेश UCC समिति (MP UCC Committee)
- गठन की तिथि: 27 अप्रैल 2026
- अध्यक्ष: न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई (Justice Retd. Ranjana Prakash Desai)
- समिति का आकार: 7 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति
UCC के पक्ष में तर्क एवं प्रमुख विवाद
UCC के पक्ष में तर्क (Arguments in Favor)
- सभी नागरिकों के लिए समान कानून: एक देश में धर्म के आधार पर कानून विभाजन समाप्त कर कानून की सर्वोपरिता स्थापित करना।
- महिलाओं के अधिकार मजबूत: तीन तलाक, निकाह हलाला जैसी प्रथाओं का अंत और संपत्ति एवं उत्तराधिकार में लैंगिक समानता।
- लैंगिक समानता: पुरुष और महिला दोनों को समान कानूनी अधिकार एवं सुरक्षा।
- सामाजिक न्याय: समाज के वंचित वर्गों एवं बच्चों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना।
- कानूनी सरलता: विभिन्न धर्मों के जटिल पर्सनल लॉ के स्थान पर एक सरल और सुलभ कानून।
- राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा: राष्ट्रीय एकीकरण और धर्मनिरपेक्षता की भावना को सुदृढ़ करना।
प्रमुख विवाद एवं चुनौतियाँ (Controversies & Challenges)
- धार्मिक स्वतंत्रता बनाम समान कानून: अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 44 (UCC) के बीच सामंजस्य की चुनौती।
- व्यक्तिगत कानूनों का प्रश्न: विभिन्न धार्मिक समुदायों के पर्सनल लॉ में हस्तक्षेपात्मक चिंताएँ।
- सांस्कृतिक विविधता: भारत की बहुसांस्कृतिक और विविध सामाजिक संरचना।
- संघीय ढाँचे से जुड़े मुद्दे: समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय होने के कारण केंद्र और राज्यों के बीच कानूनों में विविधता।
Exam Point of View & Quick Revision
अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Essentials)
- UCC → Uniform Civil Code (समान नागरिक संहिता)
- अनुच्छेद 44 → समान नागरिक संहिता (संविधान का भाग IV - DPSP)
- भाग IV → राज्य के नीति निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy)
- UCC लागू करने वाला पहला राज्य → उत्तराखंड (27 जनवरी 2025)
- UCC विधेयक पारित करने वाला चौथा राज्य → मध्य प्रदेश (2026)
- गोवा → Portuguese Civil Code, 1867 (ऐतिहासिक रूप से समान कानून वाला राज्य)
- ST समुदाय → UCC के दायरे से बाहर
- विवाह एवं तलाक → पंजीकरण अनिवार्य
- Live-in Registration → सहवास के 1 माह (30 दिन) के भीतर अनिवार्य
Full Forms
- UCC: Uniform Civil Code (समान नागरिक संहिता)
- DPSP: Directive Principles of State Policy (राज्य के नीति निदेशक तत्व)
- ART: Assisted Reproductive Technology (सहाय्यित प्रजननीय प्रौद्योगिकी)
Prelims Quick Revision
- अनुच्छेद 44 → UCC का संवैधानिक प्रावधान
- भाग IV → DPSP के तहत शामिल
- पहला लागू राज्य → उत्तराखंड
- चौथा UCC विधेयक पारित राज्य → मध्य प्रदेश
- गोवा → Portuguese Civil Code, 1867
- तीन तलाक → गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध
- निकाह हलाला → प्रतिबंधित
- विवाह पंजीकरण → ग्राम पंचायत से नगर निगम स्तर तक अनिवार्य
- ST समुदाय → UCC से पूर्णतः बाहर
Mains Value Addition
- उद्देश्य: समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू करना, महिलाओं एवं बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना, सामाजिक समानता स्थापित करना तथा संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना को व्यवहार में लागू करना है।
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
1समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026 पारित करने वाला देश का चौथा राज्य कौन-सा बना है?
2भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) के तहत समान नागरिक संहिता (UCC) का प्रावधान है?
3स्वतंत्र भारत का पहला राज्य कौन सा है जहाँ समान नागरिक संहिता (UCC) पूर्ण रूप से लागू किया गया?
4मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) समिति की अध्यक्ष कौन थीं?
5मध्य प्रदेश UCC विधेयक 2026 के अंतर्गत लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) के पंजीकरण के संदर्भ में क्या समय-सीमा निर्धारित की गई है?
6मध्य प्रदेश UCC विधेयक 2026 में निम्नलिखित में से किस समुदाय को UCC के दायरे से बाहर रखा गया है?
7स्वतंत्रता से पूर्व एवं पुर्तगाली सिविल कोड, 1867 (Portuguese Civil Code) के तहत किस भारतीय राज्य में ऐतिहासिक रूप से समान नागरिक कानून लागू रहा है?
81941 में औपनिवेशिक भारत में हिंदू कानूनों के सहिंताकरण हेतु किस समिति का गठन किया गया था जिसने बाद में हिंदू कोड बिल का आधार तैयार किया?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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