चर्चा में क्यों?
52वें जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित संपर्क सत्र (Outreach Session) में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में भाग लिया।
यह सम्मेलन फ्रांस के एवियां-लेस-बैंस (Évian-les-Bains) में 15 से 17 जून 2026 तक आयोजित किया गया था।
यद्यपि भारत जी-7 का स्थायी सदस्य नहीं है, फिर भी लगातार इस मंच पर भारत को आमंत्रित किया जाना यह दर्शाता है कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता, तकनीकी नियमन और भू-राजनीतिक संकटों के समाधान में भारत की भूमिका को दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाएं अपरिहार्य मानती हैं।
जी-7 (G-7) क्या है?
- स्थापना: जी-7 (Group of Seven) की स्थापना 1975 में फ्रांस के रैम्बुइए (Rambouillet) में हुई थी। प्रारंभ में यह जी-6 था, जापान के शामिल होने के बाद 1976 में यह जी-7 बन गया।
- सदस्य देश: अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और जापान — ये सात विकसित अर्थव्यवस्थाएं इसकी सदस्य हैं। यूरोपीय संघ (EU) भी एक अतिरिक्त प्रतिभागी के रूप में शामिल होता है।
- अध्यक्षता: जी-7 की अध्यक्षता प्रतिवर्ष एक सदस्य देश के पास बारी-बारी से आती है। 2026 में फ्रांस अध्यक्ष है।
- प्रकृति: जी-7 एक अनौपचारिक मंच है — इसका कोई स्थायी सचिवालय या कानूनी रूप से बाध्यकारी निर्णय नहीं होता, परंतु इसके बयान और प्रतिबद्धताएं वैश्विक नीतियों पर गहरा प्रभाव डालती हैं।
- संपर्क सत्र (Outreach Session): मेजबान देश कुछ गैर-सदस्य देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को शिखर सम्मेलन के एक विशेष सत्र में आमंत्रित करता है। भारत को हाल के वर्षों में लगातार इस सत्र में आमंत्रित किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन के मुख्य बिंदु
1. विकासशील देशों का कर्ज संकट
प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया कि महामारी और हालिया भू-राजनीतिक युद्धों (जैसे अमेरिका-ईरान संघर्ष) के कारण अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के विकासशील देश गंभीर कर्ज संकट से जूझ रहे हैं।
उन्होंने जी-7 देशों से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों (जैसे IMF और वर्ल्ड बैंक) में सुधार करने और इन देशों को रियायती शर्तों पर विकास कोष उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
2. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) गवर्नेंस
एआई का उपयोग मानव कल्याण के लिए होना चाहिए, न कि समाज में विभाजन या 'डीपफेक' जैसी सुरक्षा चुनौतियां खड़ी करने के लिए।
भारत के 'IndiaAI मिशन' का उदाहरण देते हुए एक वैश्विक, समावेशी और लोकतांत्रिक एआई गवर्नेंस ढांचा बनाने पर जोर दिया।
3. क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला
उन्होंने क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट) और सेमीकंडक्टर की आपूर्ति श्रृंखला को किसी एक देश के एकाधिकार से मुक्त करने की वकालत की।
उन्होंने भारत की हाल ही में यूके के साथ शुरू की गई 'क्रिटिकल मिनरल्स ऑब्जर्वेटरी' (GSCO) जैसी पहलों का जिक्र करते हुए एक पारदर्शी और सुरक्षित वैश्विक व्यवस्था का समर्थन किया।
4. जलवायु वित्त (Climate Finance)
विकसित देशों को याद दिलाया कि वे विकासशील देशों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने के लिए प्रतिवर्ष $100 बिलियन से अधिक की वित्तीय सहायता देने के अपने वादे को जल्द से जल्द पूरा करें।
भारत के लिए जी-7 संपर्क सत्र का महत्व
- वैश्विक एजेंडा निर्धारण में भागीदारी: जी-7 जैसे शक्तिशाली मंचों पर उपस्थिति भारत को वैश्विक नियम-निर्माण प्रक्रिया में अपनी बात रखने और विकासशील देशों के हितों की पैरवी करने का अवसर प्रदान करती है।
- बहुपक्षवाद को मजबूती: भारत ने हमेशा संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की मांग की है। जी-7 मंच पर यह बात दोहराना भारत की बहुपक्षवादी साख को मजबूत करता है।
- तकनीकी साझेदारियां: एआई, सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स पर जी-7 देशों के साथ सीधी चर्चा भारत के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' मिशन को तकनीकी हस्तांतरण और निवेश के माध्यम से गति प्रदान करती है।
- जलवायु वित्त में दबाव: विकसित देशों से $100 बिलियन जलवायु वित्त की मांग करना भारत को ग्लोबल साउथ (Global South) के प्रवक्ता के रूप में स्थापित करता है।
- द्विपक्षीय कूटनीति का अवसर: शिखर सम्मेलन के इतर होने वाली द्विपक्षीय बैठकें रक्षा, व्यापार और ऊर्जा समझौतों को तेजी से आगे बढ़ाने का माध्यम बनती हैं।
द्विपक्षीय बैठकें
शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया के कई प्रमुख नेताओं के साथ द्विपक्षीय और अनौपचारिक बैठकें कीं:

- फ्रांस (मेजबान देश): फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रक्षा सहयोग, राफेल-एम सौदे की प्रगति और अंतरिक्ष कूटनीति पर चर्चा हुई।
- अमेरिकी राष्ट्रपति: हाल ही में समाप्त हुए अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद वैश्विक तेल बाजार को स्थिर करने और भारत-अमेरिका व्यापार समझौतों को गति देने पर बातचीत।
- ब्रिटेन के प्रधानमंत्री: भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की प्रगति और 'क्रिटिकल मिनरल्स ऑब्जर्वेटरी' (GSCO) पर सहयोग को और आगे बढ़ाने पर चर्चा।
- यूरोपीय संघ के प्रमुख: भारत-EU व्यापार वार्ता और डिजिटल साझेदारी पर बातचीत।
भारत की प्रमुख संबंधित पहलें
- IndiaAI मिशन (2024): ₹10,000 करोड़ से अधिक के बजट के साथ एआई अनुसंधान, कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने वाला राष्ट्रीय मिशन।
- भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM): ₹76,000 करोड़ के प्रोत्साहन के साथ देश में चिप विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य।
- क्रिटिकल मिनरल्स ऑब्जर्वेटरी (GSCO): भारत और यूके की संयुक्त पहल — खनिजों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने हेतु।
- अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA): 2015 में भारत और फ्रांस द्वारा शुरू किया गया — सौर ऊर्जा को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने का मंच।
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: ₹19,744 करोड़ का मिशन — 2030 तक 5 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य।
प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
- जी-7 की स्थापना: 1975 (रैम्बुइए, फ्रांस)
- सदस्य: अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा, जापान (+ EU)
- 2026 अध्यक्षता: फ्रांस
- 52वां शिखर सम्मेलन स्थान: एवियां-लेस-बैंस (Évian-les-Bains), फ्रांस
- भारत जी-7 का सदस्य नहीं है, लेकिन संपर्क सत्र (Outreach Session) में आमंत्रित होता है।
- ISA (International Solar Alliance) — 2015 में भारत और फ्रांस द्वारा स्थापित
- GSCO: क्रिटिकल मिनरल्स ऑब्जर्वेटरी — भारत-यूके संयुक्त पहल
मुख्य परीक्षा हेतु विश्लेषणात्मक बिंदु
- जी-7 जैसे अनौपचारिक मंच वैश्विक शासन (Global Governance) में किस प्रकार नियम-निर्माण को प्रभावित करते हैं?
- भारत को जी-7 की स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए या नहीं — इस पर विभिन्न दृष्टिकोणों का विश्लेषण।
- एआई गवर्नेंस में ग्लोबल नॉर्थ बनाम ग्लोबल साउथ का दृष्टिकोण — भारत 'समावेशी एआई' की अवधारणा से किस प्रकार विश्व को मार्गदर्शन कर सकता है?
- क्रिटिकल मिनरल्स की भू-राजनीति (Geopolitics of Critical Minerals) — चीन की एकाधिकारी स्थिति और भारत की चुनौतियां।
- $100 बिलियन जलवायु वित्त प्रतिबद्धता की विफलता — विकसित देशों की जिम्मेदारी और CBDR-RC सिद्धांत।
अभ्यास प्रश्न
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
- जी-7 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
(i) जी-7 एक औपचारिक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसका स्थायी सचिवालय है।
(ii) भारत जी-7 का स्थायी सदस्य है।
(iii) 2026 में जी-7 की अध्यक्षता फ्रांस के पास है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (a) केवल (iii) (b) (i) और (iii) (c) (ii) और (iii) (d) (i), (ii) और (iii)
उत्तर: (a) केवल (iii) — जी-7 अनौपचारिक मंच है (कोई सचिवालय नहीं) और भारत इसका स्थायी सदस्य नहीं है।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
"जी-7 जैसे अनौपचारिक बहुपक्षीय मंचों में भारत की बढ़ती उपस्थिति वैश्विक शासन व्यवस्था में भारत की भूमिका को दर्शाती है।" इस कथन के आलोक में जी-7 संपर्क सत्र में भारत की भागीदारी के महत्व और चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
1जी-7 (G-7) की स्थापना कब हुई थी?
22026 में जी-7 की अध्यक्षता किस देश के पास है?
352वें जी-7 शिखर सम्मेलन 2026 का आयोजन स्थल कौन-सा था?
4अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की शुरुआत किन दो देशों ने की?
5'क्रिटिकल मिनरल्स ऑब्जर्वेटरी' (GSCO) किन दो देशों की संयुक्त पहल है?
6जी-7 समूह (G7 Group) की स्थापना किस वर्ष की गई थी?
7निम्नलिखित में से कौन-सा देश जी-7 का सदस्य नहीं है?
8प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2026 के जी-7 आउटरीच सत्र के दौरान किस प्रमुख तकनीकी गवर्नेंस की आवश्यकता पर जोर दिया?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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