Quick Takeaway & Direct Answer (संक्षेप उत्तर)
Quick Facts: अति-महत्वपूर्ण तथ्य
- विषय: मध्यकालीन एवं आधुनिक भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन
- प्रमुख यूरोपीय कंपनियाँ: पुर्तगाली, डच, अंग्रेज, डेनिश, फ्रांसीसी
- प्रमुख उद्देश्य: व्यापारिक एकाधिकार, समुद्री मार्ग खोज, उपनिवेश स्थापना, राजनीतिक नियंत्रण
- परीक्षा उपयोगिता: UPSC, MPPSC, राज्य लोक सेवा आयोग एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाएँ
यूरोपीय कंपनियों की तुलनात्मक तालिका (Comparative Matrix)
| यूरोपीय कंपनी | स्थापना वर्ष | भारत आगमन | प्रथम कारखाना (Factory) | मुख्य केंद्र / मुख्यालय | पतन का कारण / निर्णायक युद्ध |
|---|---|---|---|---|---|
| पुर्तगाली (Portuguese) | 1498 ई. | 1498 ई. | कोचीन (1503) | गोवा | डच व ब्रिटिश नौसैनिक प्रतिस्पर्धा |
यूरोपीय कंपनियों के भारत आने के प्रमुख कारण
- मसालों के व्यापार पर नियंत्रण: भारतीय मसालों (काली मिर्च, दालचीनी) के व्यापार पर नियंत्रण स्थापित करना।
- अरब व्यापारियों का एकाधिकार समाप्त करना: थल मार्ग पर अरब और वेनिस के व्यापारियों के एकाधिकार को समाप्त करना।
- सीधा समुद्री व्यापार: भारत एवं पूर्वी देशों से सीधे समुद्री व्यापारिक मार्ग खोजना।
- व्यापारिक लाभ: नए बाजार प्राप्त कर अत्यधिक व्यापारिक लाभ कमाना।
- उपनिवेश स्थापना: एशिया में व्यापारिक एवं रणनीतिक बस्तियाँ तथा उपनिवेश स्थापित करना।
- धर्म प्रचार: एशिया में ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार करना।
1. पुर्तगालियों का आगमन (Portuguese)
- 1498 ई.: वास्को-दा-गामा कालीकट (केरल) पहुँचा।
- प्रथम यूरोपीय: समुद्री मार्ग से भारत आने वाला पहला यूरोपीय यात्री वास्को-दा-गामा था।
- समुद्री मार्ग: अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप (Cape of Good Hope) मार्ग से भारत पहुँचा।
- स्वागताध्यक्ष: कालीकट के स्थानीय शासक जमोरिन ने उसका स्वागत किया।
- फ्रांसिस्को डी अल्मेडा (1505 ई.): भारत में प्रथम पुर्तगाली गवर्नर ('ब्लू वॉटर पॉलिसी' का जनक)।
- अल्फांसो डी अल्बुकर्क (1509 ई.): भारत में पुर्तगाली शक्ति का वास्तविक संस्थापक।
- 1510 ई.: अल्बुकर्क ने बीजापुर के सुल्तान से गोवा पर अधिकार कर लिया।
- राजधानी: आगे चलकर गोवा को पुर्तगाली साम्राज्य की औपचारिक राजधानी बनाया गया।
- प्रमुख व्यापारिक केंद्र: गोवा, कोचीन, दमन, दीव एवं कालीकट।
2. डच कंपनी (Dutch East India Company - VOC)
- 1602 ई.: डच ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना हुई।
- कंपनी का मूल नाम: VOC (Vereenigde Oostindische Compagnie)।
- पहला कारखाना: 1605 ई. में मसुलीपट्टनम में प्रथम डच कारखाना स्थापित हुआ।
- मुख्यालय: पुलिकट (बाद में नागापट्टनम स्थानांतरण)।
- व्यापारिक वस्तुएं: मसाले, सूती वस्त्र, नील और शोरा।
- प्रमुख व्यापारिक केंद्र: पुलिकट, नागापट्टनम, मसुलीपट्टनम, कोचीन एवं चिनसुरा (बंगाल)।
- पतन (1759 ई.): बेदरा के युद्ध (Battle of Bedara) में अंग्रेजों ने डचों को पराजित कर भारत में उनकी शक्ति समाप्त कर दी।
3. अंग्रेज (British East India Company - EIC)
- 31 दिसंबर 1600: महारानी एलिजाबेथ प्रथम द्वारा चार्टर (शाही फरमान) प्रदान कर कंपनी की स्थापना।
- 1608 ई.: कैप्टन हॉकिन्स (हेक्टर जहाज से) मुगल सम्राट जहाँगीर के दरबार पहुँचा।
- 1615 ई.: सर थॉमस रो जहाँगीर के दरबार आया और व्यापारिक छूट प्राप्त की।
- 1613 ई.: सूरत में अंग्रेजों ने अपनी प्रथम स्थायी फैक्ट्री स्थापित की।
- प्रमुख प्रेसिडेंसी केंद्र: सूरत, मद्रास (फोर्ट सेंट जॉर्ज), बंबई एवं कलकत्ता (फोर्ट विलियम)।
- 1757 ई.: प्लासी का युद्ध - बंगाल पर राजनीतिक नियंत्रण की शुरुआत।
- 1764 ई.: बक्सर का युद्ध - अंग्रेजों का भारत में वास्तविक प्रभुत्व स्थापित।
- 1765 ई.: इलाहाबाद की संधि द्वारा बंगाल, बिहार व उड़ीसा के दीवानी अधिकार प्राप्त।
- 1858 ई.: 1857 के विद्रोह के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त होकर ब्रिटिश क्राउन का प्रत्यक्ष शासन लागू हुआ।
4. डेनिश कंपनी (Danish East India Company)
- 1616 ई.: डेनिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना।
- प्रमुख व्यापारिक केंद्र: त्रांकेबार (तमिलनाडु - 1620) एवं सेरामपुर (बंगाल - 1676)।
- मुख्य गतिविधि: व्यापार से अधिक ईसाई मिशनरी गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित।
- अंतिम स्थिति: सीमित संसाधनों के कारण अपनी सभी भारतीय बस्तियाँ 1845 तक अंग्रेजों को बेच दीं।
5. फ्रांसीसी कंपनी (French East India Company)
- 1664 ई.: मंत्री जीन बैप्टिस्ट कोलबर्ट के प्रयासों से फ्रांस के राजा लुई XIV के संरक्षण में स्थापना।
- प्रथम कारखाना: 1668 ई. में फ्रैंकन कैरो द्वारा सूरत में स्थापित।
- मुख्यालय: पांडिचेरी (1673 ई. में फ्रैंको मार्टिन द्वारा स्थापित)।
- प्रमुख केंद्र: पांडिचेरी, चंद्रनगर, माहे, करैकाल एवं यानम।
- प्रसिद्ध गवर्नर: जोसेफ फ्रांस्वा डुप्ले (Dupleix) - भारतीय राजनीति में हस्तक्षेप की नीति का प्रवर्तक।
- पतन: कर्नाटक युद्धों (1746–1763) में अंग्रेजों से पराजय के बाद फ्रांसीसी राजनीतिक महत्व समाप्त।
एंग्लो-फ्रेंच संघर्ष: कर्नाटक युद्ध (Carnatic Wars 1746–1763)
- प्रथम कर्नाटक युद्ध (1746–1748): यूरोप में ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकार युद्ध का प्रभाव। फ्रांसीसियों ने मद्रास पर कब्जा किया। 1748 में ऐक्स-ला-शैपल की संधि (Treaty of Aix-la-Chapelle) के तहत मद्रास अंग्रेजों को वापस मिला।
- द्वितीय कर्नाटक युद्ध (1749–1754): हैदराबाद व कर्नाटक के आन्तरिक उत्तराधिकार विवाद के कारण। डुप्ले की नीति असफल रही और उसे फ्रांस वापस बुलाया गया। 1754 में पांडिचेरी की संधि से युद्ध विराम हुआ।
- तृतीय कर्नाटक युद्ध (1756–1763): यूरोप के सात वर्षीय युद्ध (Seven Years' War) का हिस्सा। 1760 ई. में वांडीवाश का युद्ध (Battle of Wandiwash) लड़ा गया, जिसमें आयर कूट के नेतृत्व में अंग्रेजों ने काउंट डी लाली की फ्रांसीसी सेना को निर्णायक रूप से पराजित किया।
- 1763 ई. पेरिस की संधि: पेरिस की संधि द्वारा फ्रांसीसियों को व्यापार की अनुमति तो मिली, लेकिन किलेबंदी और सेना रखने का अधिकार छीन लिया गया।
अंग्रेजों की सफलता के प्रमुख कारण
- शक्तिशाली नौसेना: अंग्रेजों के पास तत्कालीन विश्व की सबसे अद्यतन और शक्तिशाली जलसेना थी।
- आर्थिक स्वतंत्रता व सुदृढ़ता: ईस्ट इंडिया कंपनी एक निजी शेयरधारक कंपनी थी, जिससे त्वरित निर्णय संभव थे, जबकि फ्रांसीसी कंपनी पूर्णतः सरकारी नियंत्रण में थी।
- बंगाल पर नियंत्रण: 1757 में बंगाल की अपार धन-संपदा पर अधिकार से अंग्रेजों को असीमित वित्तीय संसाधन मिले।
- आधुनिक सेना व नेतृत्व: रॉबर्ट क्लाइव, हेक्टर मुनरो और आयर कूट जैसे कुशल सैन्य सलाहकारों व अधिकारियों का नेतृत्व।
- भारतीय शासकों की आपसी फूट: देशी रियासतों की आपसी प्रतिद्वंद्विता का अंग्रेजों ने पूर्ण लाभ उठाया।
यूरोपीय शक्तियों का भारत पर प्रभाव (सकारात्मक एवं नकारात्मक)
- सकारात्मक: समुद्री व्यापार एवं वैश्विक बाजार का विस्तार; बंबई, मद्रास, कलकत्ता जैसे आधुनिक बंदरगाह नगरों का विकास; प्रिंटिंग प्रेस व आधुनिक तकनीकी पद्धतियों का परिचय।
- नकारात्मक: भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों का विनाश (वि-औद्योगिकीकरण); कच्चे माल का एकतरफा निर्यात; राजनीतिक संप्रभुता का हनन तथा औपनिवेशिक शोषण।
प्रमुख घटनाओं का कालक्रम (Timeline Table)
- 1498: वास्को-दा-गामा कालीकट (केरल) पहुँचा
- 1505: अल्मेडा प्रथम पुर्तगाली गवर्नर बना
- 1510: अल्बुकर्क ने गोवा पर अधिकार किया
- 1600: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (EIC) की स्थापना (31 दिसंबर)
- 1602: डच ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC) की स्थापना
- 1613: सूरत में अंग्रेजों की पहली स्थायी फैक्ट्री
- 1616: डेनिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना
- 1664: फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना
- 1746–1763: कर्नाटक युद्ध (एंग्लो-फ्रेंच संघर्ष)
- 1757: प्लासी का युद्ध
- 1759: बेदरा का युद्ध (डचों की पराजय)
- 1760: वांडीवाश का युद्ध (फ्रांसीसियों की निर्णायक हार)
- 1763: पेरिस की संधि
- 1764: बक्सर का युद्ध
- 1765: इलाहाबाद की संधि (दीवानी अधिकार प्राप्त)
- 1858: कंपनी शासन समाप्त, ब्रिटिश क्राउन का शासन प्रारंभ
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
1वास्को-दा-गामा 1498 ई. में भारत के किस तट पर पहुँचा था और उसका स्वागत किस स्थानीय शासक ने किया था?
21510 ई. में बीजापुर से गोवा छीनकर पुर्तगाली साम्राज्य का सुदृढ़ीकरण करने वाला पुर्तगाली गवर्नर कौन था?
31759 ई. में लड़े गए 'बेदरा के युद्ध' का भारत के इतिहास में क्या परिणाम रहा?
4ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में अपनी पहली स्थायी व्यापारिक कोठी (फैक्ट्री) 1613 ई. में कहाँ स्थापित की थी?
5प्रथम कर्नाटक युद्ध (1746–1748) का अंत किस यूरोपीय संधि के साथ हुआ था?
6तृतीय कर्नाटक युद्ध के दौरान 1760 ई. में लड़े गए 'वांडीवाश के युद्ध' के संदर्भ में कौन सा कथन सत्य है?
7निम्नलिखित में से किस यूरोपीय कंपनी ने सीमित संसाधनों के कारण अपनी भारतीय बस्तियाँ अंग्रेजों को बेच दी थीं?
8यूरोपीय शक्तियों के भारत आगमन का सही कालानुक्रम क्या है?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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