1. जल-विभाजक (Water Divide) क्या है? - अवधारणा एवं परिभाषा
जल-विभाजक (Water Divide) ऐसी उच्च पर्वतीय या पठारी शीर्ष रेखाएँ (Elevated Ridges) होती हैं, जो दो समीपवर्ती अपवाह द्रोणियों (Drainage Basins) अथवा जलप्रवाह प्रदेशों को एक-दूसरे से प्राकृतिक रूप से अलग करती हैं। जब वर्षा का जल इन उच्च भू-भागों पर गिरता है, तो जल-विभाजक रेखा वर्षा जल के प्रवाह को विपरीत दिशाओं में मोड़ देती है।
मुख्य कार्य: जल-विभाजक न केवल नदियों के बहाव की दिशा निर्धारित करते हैं, बल्कि प्राकृतिक भौगोलिक प्रदेशों में अपवाह प्रणाली को सीमांकित करने का कार्य भी करते हैं।
भारत के 4 मुख्य अपवाह प्रदेश: भारत के महान जल-विभाजक (Great Water Divide of India) के आधार पर देश को मुख्य रूप से 4 अपवाह प्रदेशों में बांटा जाता है:
1
सिन्धु अपवाह प्रदेश (Indus Drainage Basin)
2
गंगा-ब्रह्मपुत्र अपवाह प्रदेश (Ganga-Brahmaputra Drainage Basin)
3
पूर्वी-प्रवाह का प्रायद्वीपीय अपवाह प्रदेश (East-Flowing Peninsular Basin)
4
पश्चिमी प्रवाह का प्रायद्वीपीय अपवाह प्रदेश (West-Flowing Peninsular Basin)
2. भारत की 4 प्रमुख जल-विभाजक रेखाएँ (Major Water Divide Ranges)
उपरोक्त चार अपवाह प्रदेशों का सीमांकन भारत की 4 मुख्य पर्वतीय जल-विभाजक रेखाओं द्वारा होता है:
(1) हिमालयन जल-विभाजक (Himalayan Water Divide): यह मुख्यतः हिमानी (Glacial) जल-स्रोत पर आधारित जल-विभाजक है। हिमाद्रि (महान हिमालय) शृंखला विश्व की सर्वाधिक ऊँची जल-विभाजक के रूप में कार्य करती है। इससे निकलने वाली नदियों का जल प्रवाह उत्तर में चीन (तिब्बत) की ओर तथा दक्षिण में भारतीय मैदानी प्रदेश की ओर होता है। यह लगभग 2,600 किमी लंबी है तथा इसकी औसत ऊँचाई 6,000 मीटर है। सिन्धु, सतलज, काली, तीस्ता और ब्रह्मपुत्र जैसी पूर्वगामी नदियाँ (Antecedent Rivers) संकरी घाटियाँ (Gorges) बनाकर इस महान् जल-विभाजक की क्रमबद्धता को तोड़ती हैं।
(2) अरावली जल-विभाजक (Aravalli Water Divide): अरावली पर्वत शृंखला भारत की दूसरी सबसे महत्त्वपूर्ण जल-विभाजक है। इसकी लम्बाई 1,100 किमी तथा औसत ऊँचाई 750-1,000 मीटर है। यह एक अवशिष्ट पर्वत शृंखला (Residual Mountain) है, जो सिन्धु अपवाह प्रदेश (जैसे लूनी व बनास नदियाँ) और गंगा अपवाह प्रदेश (चम्बल व उसकी सहायक नदियाँ) को एक-दूसरे से पृथक करती है। अरावली का उत्तरी भाग दिल्ली विभाजक (Delhi Ridge) के नाम से विख्यात है, जो अन्ततः शिवालिक शृंखला से मिल जाता है।
(3) सतपुड़ा-महादेव-मैकाल जल-विभाजक (Satpura-Mahadeo-Maikal Water Divide): मध्य प्रदेश के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण यह जल-विभाजक भारत के मध्यवर्ती भाग में स्थित है। इसकी कुल लम्बाई लगभग 1,920 किमी है तथा ऊँचाई 275 मीटर से 1,100 मीटर के मध्य है। यह जल-विभाजक उत्तर में नर्मदा व सोन (गंगा तंत्र) और दक्षिण में ताप्ती व गोदावरी (प्रायद्वीपीय तंत्र) अपवाह बेसिनों को विभाजित करता है। मैकाल श्रेणी की अमरकंटक पहाड़ी अरीय अपवाह (Radial Drainage) का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ से नर्मदा, सोन व जोहिला नदियाँ अलग-अलग दिशाओं में निकलती हैं।
3. पश्चिमी घाट जल-विभाजक के 4 प्रमुख दर्रे (Mountain Passes)
पश्चिमी घाट जल-विभाजक की निरन्तरता (Continuity) चार प्रमुख पर्वतीय दर्रों द्वारा भंग होती है:
1
थाल घाट (Thal Ghat): नासिक एवं मुंबई को जोड़ता है (महाराष्ट्र)।
2
भोर घाट (Bhor Ghat): मुंबई एवं पुणे को जोड़ता है (महाराष्ट्र)।
3
पाल घाट (Pal Ghat): नीलगिरी एवं अन्नामलाई पहाड़ियों के बीच पलक्कड़ (केरल) व कोयंबटूर (तमिलनाडु) को जोड़ता है।
4
सेनकोट्टा पास (Shencottah Pass): कार्डमम (इलायची) पहाड़ियों में स्थित, जो तिरुवनंतपुरम एवं मदुरै को जोड़ता है।
4. मध्य प्रदेश के विशेष संदर्भ में जल-विभाजक (Water Divides in MP)
MPPSC Mains भूगोल उत्तर लेखन के लिए मध्य प्रदेश के प्रमुख जल-विभाजक निम्नलिखित हैं:
विंध्याचल पर्वत श्रेणी: गंगा अपवाह तंत्र (चम्बल, केन, बेतवा) तथा नर्मदा अपवाह तंत्र के मध्य प्रमुख जल-विभाजक है।
सतपुड़ा-मैकाल श्रेणी: नर्मदा नदी घाटी (उत्तर) तथा ताप्ती व गोदावरी बेसिन (दक्षिण) को अलग करती है।
अमरकंटक पठार: भारत के अद्वितीय अरीय अपवाह (Radial Drainage Pattern) का निर्माण करता है, जहाँ से नर्मदा (पश्चिम), सोन (उत्तर-पूर्व) एवं महानदी तंत्र की नदियाँ निकलती हैं।
5. MPPSC Mains मॉडल उत्तर (3, 5 एवं 11 अंक)
प्रश्न 1 (3 अंक): जल-विभाजक (Water Divide) से आप क्या समझते हैं?
*उत्तर*: वह उच्च पर्वतीय या पठारी शीर्ष रेखा जो दो पड़ोसी अपवाह द्रोणियों को पृथक करती है तथा वर्षा जल के बहाव की दिशा निर्धारित करती है, जल-विभाजक कहलाती है। उदाहरण: अरावली श्रेणी, विंध्याचल श्रेणी।
प्रश्न 2 (5 अंक): पश्चिमी घाट जल-विभाजक की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
*उत्तर*: (1) लंबाई लगभग 1600 किमी; (2) अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी अपवाह तंत्र के मध्य महान विभाजक; (3) गोदावरी, कृष्णा, कावेरी का उद्गम स्थल; (4) इसकी निरन्तरता 4 दर्रों (थाल घाट, भोर घाट, पाल घाट, सेनकोट्टा) द्वारा भंग होती है।
प्रश्न 3 (11 अंक): भारत में पाए जाने वाले प्रमुख जल-विभाजकों का मानचित्र सहित विश्लेषणात्मक वर्णन कीजिए।
*उत्तर संरचना*: मुख्य अवधारणा ➔ 4 अपवाह प्रदेश (सिन्धु, गंगा, पूर्वी व पश्चिमी प्रायद्वीपीय) ➔ 4 मुख्य विभाजक रेखाएँ (हिमालयन, अरावली, सतपुड़ा-मैकाल, पश्चिमी घाट) ➔ दर्रे व पूर्वगामी नदियाँ ➔ निष्कर्ष व मानचित्र।
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
1हिमालयन जल-विभाजक की औसत ऊँचाई एवं लम्बाई क्रमशः कितनी है?
2अरावली जल-विभाजक का उत्तरी भाग किस नाम से विख्यात है?
3अमरकंटक पठार से निकलने वाली नदियाँ किस प्रकार का अपवाह प्रतिरूप (Drainage Pattern) बनाती हैं?
4केरल के पलक्कड़ और तमिलनाडु के कोयंबटूर को जोड़ने वाला दर्रा कौन सा है?
5निम्नलिखित में से कौन-सी नदी पश्चिमी घाट से निकलकर अरब सागर में गिरती है?
MPPSC Mains Indian Geography Paper 1 Part B Unit 1 Notes: जल विभाजक (Water Divide in India) व भारत के प्रमुख जल-विभाजक
MPPSC Mains Paper 1 (भूगोल) के लिए भारत के चार प्रमुख जल-विभाजकों (हिमालयन, अरावली, सतपुड़ा-मैकाल व पश्चिमी घाट) का सम्पूर्ण विश्लेषणात्मक विवरण, अपवाह प्रदेश, मानचित्र, 3, 5 व 11 अंक के प्रश्न उत्तर एवं MCQs।
Deepraj Sikarwar (Editorial Team)5 अगस्त 202612 min read
(4) पश्चिमी घाट पर्वतीय जल-विभाजक (Western Ghats Mountain Water Divide): पश्चिमी घाट (सह्याद्रि) श्रेणी लगभग 1,600 किमी लंबी है, जो उत्तर से दक्षिण तक फैली हुई है। यह भारत के दो प्रमुख महासागरीय अपवाह तंत्रों — अरब सागर अपवाह (पश्चिम की ओर) एवं बंगाल की खाड़ी अपवाह (पूर्व की ओर) को पृथक करती है। यहाँ से निकलने वाली अधिकांश बड़ी नदियाँ (गोदावरी, कृष्णा, कावेरी) अनुवर्ती प्रकार (Consequent Drainage) के अपवाह प्रतिरूप का पालन करते हुए पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं, जबकि कुछ तीव्रगामी नदियाँ (जैसे पेरियार, भरतपुझा, मांडवी) पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में गिरती हैं।