भारत में पर्यावरण कानून की आवश्यकता का वर्णन एवं पर्यावरण नीति का विश्लेषण
भारत में पर्यावरण कानून की आवश्यकता क्यों है? (Need for Environmental Legislation)
भारत तीव्र औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और जनसंख्या वृद्धि के दौर से गुजर रहा है। प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन, वनों की कटाई, औद्योगिक अपशिष्टों के अनियंत्रित निस्तारण तथा वायु व जल प्रदूषण से निपटने के लिए सुदृढ़ पर्यावरण कानून (Environmental Law) और नीतियों की अत्यंत आवश्यकता है।
- संवैधानिक दायित्व: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48A (राज्य नीति के निर्देशक तत्व) के तहत राज्य को पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन तथा वनों व वन्यजीवों की रक्षा का निर्देश दिया गया है। साथ ही अनुच्छेद 51A(g) के तहत प्रत्येक नागरिक का यह मौलिक कर्तव्य है कि वह प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करे।
- मानव अधिकारों की सुरक्षा: सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के अंतर्गत 'स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार' को मौलिक अधिकार माना है (सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य वाद, 1991)।
भारत की पर्यावरण नीति का विश्लेषण कीजिए (Analysis of India's Environmental Policy)
भारत की पर्यावरण नीति का विकास 1972 के स्टॉकहोम घोषणापत्र से शुरू हुआ।
- 1राष्ट्रीय पर्यावरण नीति 2006 (National Environment Policy 2006): इसका मुख्य उद्देश्य सतत विकास (Sustainable Development), पारिस्थितिक प्रणालियों का संरक्षण और पर्यावरणीय संसाधनों के प्रबंधन में समानता सुनिश्चित करना है।
- 2संस्थागत विकास: 1972 में गठित राष्ट्रीय पर्यावरण नीति एवं योजना परिषद (NCPEP) को 1985 में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (MoEF) तथा वर्तमान में MoEFCC में बदला गया।
भारत के 11 प्रमुख पर्यावरण कानून (11 Major Environmental Laws in India)
प्रतियोगी परीक्षाओं (MPPSC & UPSC) की दृष्टि से भारत के 11 प्रमुख पर्यावरण अधिनियम निम्नलिखित हैं:
| क्रमांक | अधिनियम / कानून का नाम (Act Name) | वर्ष (Year) | मुख्य उद्देश्य / विवरण |
|---|---|---|---|
| 1 | वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम (Wildlife Protection Act) | 1972 | वन्य जीवों, पक्षियों और वनस्पतियों की रक्षा, 6 अनुसूचियाँ |
| 2 | जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम (Water Act) | 1974 | जल निकायों की शुद्धता बहाल करना, CPCB & SPCB का गठन |
| 3 | जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) उपकर अधिनियम (Water Cess Act) | 1977 | औद्योगिक जल उपभोग पर शुल्क वसूलना |
| 4 | वन (संरक्षण) अधिनियम (Forest Conservation Act) | 1980 | वनों की कटाई रोकना, गैर-वन उपयोग हेतु केंद्र की अनुमति |
| 5 | वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम (Air Act) | 1981 | वायु प्रदूषण नियंत्रण (1987 में ध्वनि प्रदूषण शामिल) |
| 6 | पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम (Environment Protection Act) | 1986 | भोपाल गैस त्रासदी के बाद व्यापक छाता विधान (Umbrella Act) |
| 7 | लोक दायित्व बीमा अधिनियम (Public Liability Insurance Act) | 1991 | खतरनाक पदार्थों से दुर्घटना होने पर तत्काल राहत |
| 8 | राष्ट्रीय पर्यावरण अपीलीय प्राधिकरण अधिनियम (NEAA Act) | 1997 | पर्यावरणीय स्वीकृतियों के खिलाफ अपील सुनने हेतु निकाय |
| 9 | जैव विविधता अधिनियम (Biological Diversity Act) | 2002 | जैव विविधता संरक्षण, NBA (चेन्नई) & BMC गठन |
| 10 | राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण अधिनियम (NGT Act) | 2010 | पर्यावरण मामलों का 6 माह में त्वरित समाधान (18 ऑक्टोबर 2010) |
| 11 | क्षतिपूरक वनीकरण कोष अधिनियम (CAMPA Act) | 2016 | वन भूमि डायवर्जन के एवज में पुनर्वनीकरण हेतु कोष प्रबंधन |
पर्यावरण प्रदूषण कानून एवं मानव समुदाय (Environmental Pollution Law and Human Communities)
पर्यावरण प्रदूषण का मानव समुदाय पर प्रभाव एवं कानूनी सुरक्षा
पर्यावरण प्रदूषण (जल, वायु, मृदा, ध्वनि एवं खतरनाक रसायन) प्रत्यक्ष रूप से मानव समुदायों के स्वास्थ्य, आजीविका और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
- भोपाल गैस त्रासदी (1984): इसने भारत में औद्योगिक सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य कानूनों की पुनर्रचना की नींव रखी, जिसके परिणामस्वरूप पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 तथा लोक दायित्व बीमा अधिनियम 1991 अस्तित्व में आए।
- प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle): सर्वोच्च न्यायालय ने वेल्लोर नागरिक कल्याण मंच वाद (1996) में यह स्पष्ट किया कि प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग को पर्यावरण की क्षतिपूर्ति और प्रभावित मानव समुदाय को मुआवजा देना होगा।
- सावधानी सिद्धांत (Precautionary Principle): पर्यावरणीय क्षति की संभावना होने पर कानूनी निकायों को अग्रिम सुधारात्मक कदम उठाने की शक्ति दी गई है।
पर्यावरण संरक्षण हेतु भारत में कौन सा अधिनियम लागू नहीं है / अपवर्जित कानून
पर्यावरण संरक्षण हेतु NGT के तहत कौन से अधिनियम लागू नहीं हैं?
प्रतियोगी परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है कि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) के क्षेत्राधिकार में कौन से अधिनियम शामिल नहीं हैं?
- 1वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972): NGT इस कानून के तहत दायर अपीलों की सुनवाई नहीं करता। इसके मुकदमे उच्च न्यायालय या संबंधित वन्यजीव प्राधिकारियों के पास जाते हैं।
- 2भारतीय वन अधिनियम, 1927 (Indian Forest Act, 1927): यह अधिनियम भी NGT अधिनियम 2010 की अनुसूची-1 से बाहर रखा गया है।
- स्मरण तथ्य: NGT केवल 5 सिविल पर्यावरण कानूनों (जल अधिनियम 1974, जल उपकर 1977, वायु अधिनियम 1981, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, जैव विविधता अधिनियम 2002) के तहत सुनवाई करता है।
पर्यावरण अधिनियम लागू होने की तिथियाँ एवं वन-लाइनर तथ्य
भारत में प्रमुख पर्यावरण अधिनियम कब लागू हुए? (Enforcement Dates)
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम: 9 सितंबर 1972 को लागू हुआ।
- जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम: 23 मार्च 1974 को लागू हुआ।
- वन (संरक्षण) अधिनियम: 25 अक्टूबर 1980 को लागू हुआ (अध्यादेश के रूप में)।
- वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम: 16 मई 1981 को लागू हुआ।
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम: राष्ट्रपति की स्वीकृति 23 मई 1986 को मिली तथा यह 19 नवंबर 1986 (इंद्रा गांधी की जयंती) को लागू हुआ।
- जैव विविधता अधिनियम: 5 फरवरी 2003 को राष्ट्रपति की सहमति मिली (कानून 2002 का है)।
- राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT): 18 अक्टूबर 2010 को औपचारिक रूप से गठित हुआ।
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
1पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 भारत में किस तिथि को आधिकारिक रूप से लागू हुआ था?
2भारत में किस अधिनियम के तहत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का गठन किया गया था?
3निम्नलिखित में से कौन सा कानून राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है?
4भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद संसद को अंतरराष्ट्रीय समझौतों (जैसे स्टॉकहोम 1972) को लागू करने के लिए पर्यावरण कानून बनाने की शक्ति देता है?
5राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) की स्थापना किस वर्ष हुई थी और इसका मुख्यालय कहाँ है?





